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भूख से उपजी भुखमरी और इन दोनों से विवश हो जब कोई व्यक्ति भिखारी बन जाता है, तो वह व्यक्ति समाज के लिए अभिशाप बन जाता है और उसे सामाजिक समस्या करार दिया जाता है। सन् 2000 में ये अनुमान लगाया गया था कि 2010 के बाद दुनियां में...

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भ्रष्टाचार ने जिस प्रकार से हमारी पूरी व्यवस्था को जकड़ लिया है और यह पूरी राजनीतिक प्रणाली में ऊपर से लेकर नीचे तक जम गया है इससे उबरने का इन्तजाम यदि वर्तमान राजनीतिज्ञों की पीढ़ी नहीं करेगी तो आने वाली पीढि़या इन्हें कभी माफ नहीं करेंगी और यह इतिहास में...

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26 जनवरी 1950 का दिन स्वतंत्र राष्ट्र का उदय उसकी संकल्प सिद्धि का दिवस था। बहुत गहरी प्रसव पीड़ा के बाद अंततः भारतीय स्वतंत्रता या यों कहें कि भारतीय अस्मिता का जन्म हुआ था, किन्तु अफसोस कि इसके उत्पन्न होते ही इसके अपने ही जन्मदाताओं ने बड़ी चालाकी से...

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पत्रकारों से वार्ता के दौरान उत्तर प्रदेश के श्री राज्यपाल महोदय ने कहा कि ‘‘ईवीएम पर अब आपत्ति जताने का आधार नहीं! उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने जब चुनौती दी थी तब कोई नहीं आया’’! श्री राज्यपाल महोदय ईवीएम का प्रमुख कम्पोनेंट विदेश से आयात होता है तो...

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भारतीय समाज में अश्लीलता सदियों से व्याप्त रही है। जिसको भिन्न-भिन्न रूपों में परिभाषित किया गया है। परंतु समाजशास्त्रियों तथा बुद्धजीवियों ने अश्लीलता को असभ्यता से जोड़कर

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‘बेटी’ शब्द जिसका नाम सुनते ही अधिकांश लोगों के चेहरे की हवाईयां उड़ जाती हैं, मानों कोई बुरी ख़बर से पाला पड़ गया हो? यह तो मात्र नाम का ही प्रभाव

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देश और जनता की हालत से मैं दुखी हूं। इसलिए आपके बीच आया हूं। अब बस मैं आपकी सेवा करना चाहता हूं… राजनीति से अलग किसी दूसरे क्षेत्र के स्थापित शख्सियत को जब भी मैं ऐसा कहता सुुनता हूं तो उसका भविष्य मेरे सामने नाचने लगता है। मैं समझ...

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अब स्वर्ग सिधार चुके एक ऐसे जनप्रतिनिधि को मैं जानता हूं जो युवावस्था में किसी तरह जनता द्वारा चुन लिए गए तो मृत्यु पर्यंत अपने पद पर कायम रहे। इसकी वजह उनकी लोकप्रियता व जनसमर्थन नहीं बल्कि एक अभूतपूर्व तिकड़म थी। जिसमें उनके परिवार के कुछ सदस्य शामिल हेोते...

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बचपन में स्कूल की किताबों में स्वतंत्रता सेनानी लाल – बाल – पाल के बारे में खूब पढ़ा था। जिज्ञासा हो ने पर पता चला कि तीनों महान स्वतंत्रता सेनानी थे। जिनका आजादी के आंदोलन में बड़ा योगदान था। कॉलेज तक पहुंचने पर देश के सबसे बड़े सूबे के...

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भारत जैसे देश में जहाँ धर्मान्धता अपनी चरम सीमा पर व्याप्त है। वहाँ पर चाहे भी तो दलगत राजनीति से ऊपर नहीं उठाया जा सकता है। वस्तुतः जाति और धर्म यदि किसी देश की रीढ़ है, तो उनसे उपजे खतरे ही उस देश को खोखला बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका...

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