क्या ईरान पर हमले के पीछे सऊदी की भूमिका? ट्रंप–MBS बातचीत को लेकर बड़ा दावा

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने डोनाल्ड ट्रंप से निजी बातचीत कर ईरान पर सख्त कार्रवाई की पैरवी की। जानें वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट और पश्चिम एशिया की राजनीति पर इसके संभावित असर।

अंतरराष्ट्रीय डेस्क
ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले को लेकर एक नई रिपोर्ट ने पश्चिम एशिया की राजनीति में हलचल मचा दी है। दावा किया गया है कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कई बार निजी बातचीत कर ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की पैरवी की। हालांकि इन दावों पर संबंधित पक्षों की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

रिपोर्ट में क्या दावा?

अमेरिकी अखबार The Washington Post की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि पिछले महीने MBS और ट्रंप के बीच कई निजी कॉल हुए। रिपोर्ट के मुताबिक, इन बातचीतों में ईरान पर सैन्य दबाव बढ़ाने और संभावित हमले के विकल्पों पर चर्चा की गई।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ट्रंप कूटनीतिक समाधान की संभावना तलाशना चाहते थे, लेकिन सऊदी नेतृत्व की ओर से ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने पर जोर दिया जा रहा था।

ईरान-सऊदी संबंधों की पृष्ठभूमि

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई क्षेत्रीय राजनीति में लंबे समय तक प्रभावशाली भूमिका निभाते रहे। उनकी नीतियों का असर पूरे पश्चिम एशिया में देखा गया।

दिलचस्प बात यह है कि हाल के वर्षों में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मध्यस्थता से ईरान और सऊदी अरब के रिश्तों में कुछ सुधार भी देखा गया था। इसके बावजूद यदि रिपोर्ट के दावे सही हैं, तो यह क्षेत्रीय कूटनीति के लिए बड़ा संकेत माना जाएगा।

इजरायल और अमेरिका का समीकरण

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पहले से ही ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के पक्षधर रहे हैं। ऐसे में यदि सऊदी नेतृत्व ने भी समान दबाव बनाया हो, तो यह अमेरिका की पश्चिम एशिया नीति को प्रभावित करने वाला कारक बन सकता है।

कुशनर फैक्टर

ट्रंप प्रशासन के दौरान उनके दामाद जेरेड कुशनर और सऊदी नेतृत्व के बीच करीबी संबंध चर्चा में रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन रिश्तों ने व्हाइट हाउस के भीतर सऊदी दृष्टिकोण को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने में भूमिका निभाई हो सकती है।

आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल इन दावों पर सऊदी अरब, अमेरिका या अन्य संबंधित पक्षों की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह जानकारी पुष्ट होती है, तो इससे पश्चिम एशिया की सामरिक और कूटनीतिक स्थिति पर व्यापक असर पड़ सकता है।

ईरान, सऊदी अरब, अमेरिका और इजरायल के बीच जटिल संबंध लंबे समय से वैश्विक राजनीति के केंद्र में रहे हैं। ताजा रिपोर्ट ने इन समीकरणों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में आधिकारिक बयानों और कूटनीतिक घटनाक्रम से स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।