women victim

युग पर युग बदले, सोच-विचार बदले, समय ने करवट ली, विकास और तरक्की आसमां छूने लगे, नदी, नाले, खेत खलियान सभी बदल गये। बस नहीं बदली तो नारी की तकदीर।

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artandobscenity

भारतीय समाज में अश्लीलता सदियों से व्याप्त रही है। जिसको भिन्न-भिन्न रूपों में परिभाषित किया गया है। परंतु समाजशास्त्रियों तथा बुद्धजीवियों ने अश्लीलता को असभ्यता से जोड़कर

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विज्ञान और प्रौद्योगिकी की कोख से ही नई भोगवादी सभ्यता का जन्म हुआ है, उसने जीवन और प्रकृति के प्रति मानव – दृष्टिकोण में एक बुनियादी परिवर्तन कर दिया है। प्रकृति के साथ व्यवहार करने का हमारा जो रिश्ता था वह बिल्कुल बदल गया है। अब प्रकृति मानव –...

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कश्मीर भारतीय उपमहाद्वीप का एक हिस्सा है जिसके अलग-अलग भागों पर भारत तथा पाकिस्तान का अधिपत्य है । भारतीय कश्मीर जम्मू और कश्मीर प्रान्त का एक खण्ड है । पाकिस्तान इस पर भारत का अधिकार नहीं मानता और इसे अधिकृत करना चाहता है । कश्मीर एक मुस्लिमबहुल प्रदेश है। आज...

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हर तरह के जीवन का आरंभ एक छोटे सेल में होता है जो पोटोप्लाइजम से भरा रहता है। सेल इतना छोटा होता है कि वो माइक्रोस्कोप से ही देखा जा सकता है। हमारे शरीर में करीब 2600000 करोड़ सेल होते हैं।

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यद्यपि भारत में प्राचीन काल से ही विधि की सर्वोच्चता रही है। सुदृढ़ गुप्तचर सेवा की सहायता से कानून को दूरस्त रखने की परम्परा भी बहुत पहले से चली आ रही है। दोषी व्यक्तियों को दण्ड का विधान भी भारतीय कानून व्यवस्था में पुलिस की छवि बर्बरता व प्रताड़ना...

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वेश्यावृत्ति (prostitution) एक शुल्क के लिए ग्राहकों की आवश्यकताओं जैसे यौन संतुषिट के लिए शरीर को बेचना है जिससे एक महिला को आजीविका कमाने का मौका मिले। प्राचीन काल से ज्ञात वेश्यावृत्ति का मतलब है कि आप किसी महिला के साथ यौन संबंध बनाने के बाद उसका भुगतान पैसों...

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भूख से उपजी भुखमरी और इन दोनों से विवश हो जब कोई व्यक्ति भिखारी बन जाता है, तो वह व्यक्ति समाज के लिए अभिशाप बन जाता है और उसे सामाजिक समस्या करार दिया जाता है। सन् 2000 में ये अनुमान लगाया गया था कि 2010 के बाद दुनियां में...

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‘बेटी’ शब्द जिसका नाम सुनते ही अधिकांश लोगों के चेहरे की हवाईयां उड़ जाती हैं, मानों कोई बुरी ख़बर से पाला पड़ गया हो? यह तो मात्र नाम का ही प्रभाव

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देश और जनता की हालत से मैं दुखी हूं। इसलिए आपके बीच आया हूं। अब बस मैं आपकी सेवा करना चाहता हूं… राजनीति से अलग किसी दूसरे क्षेत्र के स्थापित शख्सियत को जब भी मैं ऐसा कहता सुुनता हूं तो उसका भविष्य मेरे सामने नाचने लगता है। मैं समझ...

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