प्रेम, सौंदर्य, देशप्रेम, रहस्यानुभूति, दर्शन, प्रकृति-चित्रण, धर्म आदि विविध विषयों को अपनी विविध साहित्यिक रचनाओं के माध्यम से पाठकों तक पहुँचाने वाले जयशंकर प्रसाद का समग्र साहित्य प्राचीन भारतीय संस्कृति की गौरव और गरिमा के साथ-साथ भारतीय जीवन मूल्य का बहुमूल्य दस्तावेज है। नाटक के क्षेत्र में उन्होंने कई...

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भारतेंदु हरिश्चंद्र को हिंदी साहित्य में आधुनिकता का प्रवर्तक माना जाता है. भारतेंदु स्वयं एक बहुत बड़े नाटककार भी थे. उन्होंने अपने नाटक के माध्यम से देश में व्याप्त अनेकों समस्याओं को देश वासियों से समक्ष प्रस्तुत किया. ‘अंधेर नगरी’ उनका सर्वाधिक महत्वपूर्ण व्यंग्य-नाटक है, जो सत्ता की विवेकहीनता...

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जिस समय प्रेमचंद गोदान लिख रहे थे, उस समय उनके सामने स्वराज की नयी कल्पनाएँ और धारणाएं मौजूद थी. वे एक ऐसी स्वाधीनता चाहते थे जो राजनीतिक ही नहीं, सामाजिक और सांस्कृतिक भी हो. वे उपनिवेशवाद से ही नहीं, सामंती और पूंजीवादी शोषण, पराधीनता, संकीर्ण राष्ट्रवाद और जाती व्यवस्था...

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जाति जिसके आधार पर ही भारत को विविधाताओ वाला देश कहा जाता हैं । लेकिन ये विविधता सदियों से जातिगत भेद को जन्म देती आई हैं। इसके बहुत सारे प्रमाण मजहबी ग्रथों में प्रयुक्त हैं। महाभारत में एकलव्य के साथ हुए जातिगत बर्बरता ने जातिभेद की नींव ही रख...

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अपने घर से कोसों दूर जंगलों पहाड़ियों में पैदल घूमना, दलित आदिवासियों के पास जाकर उनकी स्थिति को जानना, मजदूरों की झोपड़ियों में बैठकर उनकी बात सुनना उनकी परेशानियों, डर, अभावों को दूर करना, उनके हक के लिए संघर्ष करना काफी मुश्किल कार्य है। परेशानियां और भी बढ़ जाती...

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लेखक, फिल्म एवं टीवी पटकथा-संवाद लेखक, हिंदी जगत के प्रमुख व्यंगकार शरद जोशी जी का जन्म 21 मई 1931 को मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर में हुआ। देश की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक उठा-पटक और ज़मीनी राजनीति का जितना सटीक चित्रण जोशी जी की पैनी कलम ने पेश किया उसका कोई...

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कान्तिकरी महापुरुष राजा राममोहन राय का जन्म पश्चिम बंगाल में हुगली जिले के राधानगर गांव में 22 मई1772 को हुआ था । राजा राममोहन राय की प्रारंभिक शिक्षा राधानगर में हुई। उसके बाद राजा राममोहन राय के पिता रामकांत राय जो वैष्णव समर्थक थे। उन्हें आगे की पढ़ाई के...

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निडरता, समानता, प्रेम, वात्सल्य, व्यंग, वास्तविकता, विरोध, समर्थन, निश्चलता और जीवंतता की परिचायक है बाबा नागार्जुन उर्फ वैद्यनाथ मिस्र की कविताएँ। बिहार के विख्यात मधुबनी जिले का तरउनी गांव। गोकुल मिसिर के घर पैदा हुए ठक्कन।ठक्कन महाशय का असल नाम रखा गया बैद्यनाथ मिसिर। प्रारंभिक शिक्षा गांव की पाठशाला...

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उर्दू अदब के अज़ीम अफ़सानानिगार सआदत हसन मंटो की 107वीं सालगिरह 11 मई को मनाई गई। मन्टो 11 मई 1912 को लुधियाना के शहर समराला में पैदा हुए। बाप की सख़्ती और माँ की शफ़क़त में मन्टो की शख़्सियत पनपी। हमेशा मुआशरे की दुखती रग पर हाथ रखने वाले...

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