Muzaffarpur Hospital Fire News: प्रसाद हॉस्पिटल अग्निकांड में धीरज गिरी ने अपनी जान जोखिम में डालकर ICU में फंसे 7 लोगों को बचाया। जानिए आग की भयावह रात की पूरी कहानी।
बिहार के मुजफ्फरपुर में स्थित प्रसाद हॉस्पिटल में गुरुवार तड़के लगी भीषण आग ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया। इस दर्दनाक हादसे के बीच एक युवक ने अपनी जान की परवाह किए बिना सात लोगों को मौत के मुंह से बाहर निकालकर मानवता की मिसाल पेश की। धीरज गिरी नाम के इस युवक की बहादुरी अब पूरे शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है।
रात 3 बजे चीख-पुकार से खुली नींद
धीरज गिरी अस्पताल के पास स्थित एक मिठाई की दुकान में काम करते हैं। उन्होंने बताया कि गुरुवार सुबह करीब तीन बजे अचानक लोगों के चीखने-चिल्लाने की आवाज सुनकर उनकी नींद खुल गई। बाहर निकलकर देखा तो प्रसाद हॉस्पिटल की चौथी मंजिल पर स्थित ICU से आग की तेज लपटें और काला धुआं निकल रहा था।
मरीजों और उनके परिजनों में अफरा-तफरी मची हुई थी। हर कोई अपनी जान बचाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन ICU के अंदर जाने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पा रहा था।
धुएं और आग के बीच ICU में घुस गए धीरज
धीरज ने बताया कि हालात बेहद भयावह थे। पूरा ICU काले धुएं से भर चुका था और कुछ भी साफ दिखाई नहीं दे रहा था। इसके बावजूद उन्होंने चौथी मंजिल तक पहुंचकर मरीजों को बचाने का फैसला किया।
उन्होंने एक-एक कर सात लोगों को ICU से बाहर निकाला। किसी को गोद में उठाकर, किसी को चादर में लपेटकर और कुछ मरीजों को बेड सहित सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया।
दम घुटने लगा तो तोड़ी खिड़की
रेस्क्यू के दौरान धीरज खुद भी गंभीर खतरे में फंस गए थे। उन्होंने बताया कि धुएं के कारण उनका दम घुटने लगा था और सांस लेना मुश्किल हो गया था।
उन्होंने कहा,
“मुझे लगा कि शायद अब मैं भी बाहर नहीं निकल पाऊंगा। तब मैंने खिड़की का शीशा तोड़ दिया ताकि धुआं बाहर निकल सके। इस दौरान मेरा हाथ बुरी तरह कट गया, लेकिन उस समय लोगों की जान बचाना सबसे जरूरी था।”
ICU के अंदर का मंजर था बेहद डरावना
धीरज के मुताबिक ICU के अंदर कई मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे। कुछ मरीज बेड से उतरकर खुद बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे, जबकि कई लोग जमीन पर पड़े मदद की गुहार लगा रहे थे।
आग और धुएं के कारण कई मरीजों के चेहरे झुलस गए थे। पूरे वार्ड में चीख-पुकार मची हुई थी और हर सेकंड किसी की जिंदगी पर भारी पड़ रहा था।
अभी भी नहीं भूल पा रहे वह भयावह रात
घटना के कई घंटे बाद भी धीरज गिरी उस रात के खौफनाक मंजर को भूल नहीं पा रहे हैं। उनके चेहरे और शरीर पर धुएं और संघर्ष के निशान साफ दिखाई दे रहे हैं।
जब अधिकांश लोग अपनी जान बचाने की कोशिश में लगे थे, तब धीरज ने अपनी जान जोखिम में डालकर सात परिवारों की खुशियां बचा लीं। उनकी बहादुरी को लोग एक सच्चे हीरो और फरिश्ते की तरह याद कर रहे हैं।
मानवता की मिसाल बने धीरज गिरी
मुजफ्फरपुर अग्निकांड ने एक बार फिर अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, लेकिन इस हादसे के बीच धीरज गिरी जैसे साहसी युवाओं ने यह साबित कर दिया कि संकट की घड़ी में इंसानियत सबसे बड़ी ताकत होती है।
उनकी बहादुरी और साहस की कहानी अब पूरे बिहार समेत देशभर में प्रेरणा का स्रोत बन रही है।

