बचपन शब्द सुनते ही हम अपने मन की सुनहरी यादों मॆ कहीं खो जाते हैं. बचपन की कल्‍पना करने भर से ही एक अजीब सा एहसास होता है और याद आती है हम्जोलियाँ स्‍कूल और शरारतों की, पर दिनों दिन बढ रही व्‍यस्‍तता और आधुनिकता की अंधी दौड़ में...

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भारत जैसे देश में जहाँ धर्मान्धता अपनी चरम सीमा पर व्याप्त है। वहाँ पर चाहे भी तो दलगत राजनीति से ऊपर नहीं उठाया जा सकता है। वस्तुतः जाति और धर्म यदि किसी देश की रीढ़ है, तो उनसे उपजे खतरे ही उस देश को खोखला बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका...

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सोशल मीडिया का आविष्कार लोगों को आपस में जोड़ने के लिए हुआ था लेकिन आजकल यह लोगों को एक दूसरे से दूर कर रही है। फेसबुक, व्हाट्सएप,यू-ट्यूब, इंस्टाग्राम, टि्वटर आदि के माध्यम से माध्यम से जहां यह सोचा गया था कि था कि लोग आपस में जुड़ेंगे और एक...

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