जानिए वह दौर जब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ‘सुशासन मॉडल’ पाकिस्तान में भी चर्चा का विषय बना। इमरान खान से मुलाकात, पाकिस्तान मीडिया की सुर्खियां और कराची-लाहौर में बिहार मॉडल की गूंज।
जब ‘बिहार मॉडल’ की चर्चा पाकिस्तान तक पहुंची
भारतीय राजनीति में एक समय ऐसा दौर आया जब सत्ता की राजनीति से ज्यादा विकास मॉडल सुर्खियों में था। जिस समय गुजरात मॉडल के कारण नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहे थे, उसी दौरान नीतीश कुमार का ‘बिहार मॉडल’ भी देश ही नहीं, बल्कि दुनिया में चर्चा का केंद्र बन चुका था।
2005 के बाद बिहार में सुशासन, कानून-व्यवस्था, महिला सशक्तिकरण और आर्थिक सुधारों के कारण बिहार एक नए और मजबूत राज्य के रूप में उभर रहा था। इसी सफलता ने नीतीश कुमार को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई—और यह चर्चा पाकिस्तान तक पहुंच गई।
8 नवंबर 2012: जब पाकिस्तान ने कहा—‘Welcome Nitish Kumar – Architect of Bihar’s Growth’
नीतीश कुमार के पाकिस्तान पहुंचते ही कराची एयरपोर्ट पर बड़े-बड़े पोस्टर लगे थे जिन पर लिखा था:
“Welcome Nitish Kumar – Architect of Bihar’s Growth.”
यह सिर्फ एक औपचारिक स्वागत नहीं था; यह संदेश था कि भारत का विकास मॉडल अब सीमाओं के पार भी उत्सुकता और चर्चा का विषय बन चुका था।
पाकिस्तान मीडिया लगातार पूछ रहा था—
“Bihar Model आखिर है क्या?”
कई जगहों पर लोगों ने उनसे शासन और विकास का फॉर्मूला तक मांगा।
इमरान खान से मुलाकात: ‘चाय पर विकास का फॉर्मूला’
इस दौरे का सबसे चर्चित पल था नीतीश कुमार और इमरान खान का अनौपचारिक कॉफी-सेशन।
तब इमरान खान ने नीतीश से कहा था—
“आपने गरीब राज्य को विकास की रफ्तार दी है, यह पाकिस्तान के लिए प्रेरक है।”
यह बयान भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के अखबारों में सुर्खियां बना।
यह मुलाकात राजनीति से परे, दो नेताओं के बीच विकास, प्रशासन और सुशासन पर गहन बातचीत का संकेत थी।
कराची से लाहौर तक ‘बिहार मॉडल’ की खोज
दौरे के दौरान नीतीश ने कराची, इस्लामाबाद और लाहौर में व्यापारिक समूहों, सांसदों और सामाजिक संगठनों से मुलाकात की। हर जगह एक ही सवालों की बौछार थी—
- बिहार में अपराध कैसे घटा?
- महिलाओं को 50% आरक्षण कैसे मिला?
- सड़क, शिक्षा और कृषि सुधार कैसे एक साथ चले?
- आर्थिक वृद्धि की रफ्तार कैसे बढ़ी?
नीतीश कुमार ने कहा—
“Good Governance is the Real Engine of Development.”
कराची में व्यापारियों के साथ मीटिंग में उन्होंने बिहार के हस्तशिल्प, कृषि और IT क्षेत्र को पाकिस्तान के बाजार से जोड़ने पर भी जोर दिया।
इतिहास और संस्कृति की यात्रा: मोहनजोदड़ो से डेरा साहिब तक
नीतीश कुमार ने पाकिस्तान दौरे में—
- मोहनजोदड़ो
- टैक्सिला
- गुरुद्वारा डेरा साहिब
- डेटा दरबार
जैसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों का भी दौरा किया।
लाहौर में एक बुजुर्ग ने उन्हें गले लगाकर कहा—
“आप भारत से नहीं, पटना से आए हैं… हमारा साझा इतिहास वही से शुरू होता है।”
यह क्षण दोनों देशों के सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाता था।
राजनीति से परे एक ‘मानवीय यात्रा’
8 नवंबर से 16 नवंबर 2012 तक चले इस दौरे के अंत में वाघा बॉर्डर पर नीतीश कुमार ने कहा—
“यह यात्रा सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि मानवीय अनुभव थी। पाकिस्तान की मेजबानी अविस्मरणीय रहेगी।”
विशेषज्ञों के अनुसार, यह वह दुर्लभ दृश्य था जब एक भारतीय मुख्यमंत्री पाकिस्तान में विकास, सुशासन और नेतृत्व का प्रतीक बनकर छाए हुए थे।
जब नीतीश बने ‘अंतरराष्ट्रीय सुशासन मॉडल’ का चेहरा
आज जब नीतीश कुमार 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बन चुके हैं, तो यह याद करना जरूरी है कि उनका ‘बिहार मॉडल’ सिर्फ भारत में ही नहीं, पाकिस्तान तक चर्चा का विषय रहा है।
यह वह दौर था जब—
- बिहार तेजी से विकास कर रहा था
- सुशासन के नए मानक स्थापित हो रहे थे
- एक भारतीय नेता पाकिस्तान में ‘गुड गवर्नेंस’ का चेहरा बना
और पहली बार, बिहार का नाम एक विकास मॉडल के रूप में अंतरराष्ट्रीय मंच पर उभर रहा था।

