मोदी सरकार में रुपये की गिरावट मनमोहन सरकार से ज्यादा हुई या कम? जानें 2004 से 2024 तक डॉलर के मुकाबले रुपये में कितनी कमजोरी आई, साथ ही समझें विदेशी कर्ज, फॉरेक्स रिज़र्व और अर्थव्यवस्था से जुड़ी अहम बातें।
मोदी राज में कितना टूटा रुपया, मनमोहन काल के मुकाबले कम या ज्यादा?
पिछले कुछ समय से भारतीय रुपया लगातार कमजोर होता जा रहा है। डॉलर के मुकाबले इसकी कीमत रिकॉर्ड निचले स्तर के पास पहुंच गई है। रुपये की मजबूती या कमजोरी का माप उसकी डॉलर के मुकाबले वैल्यू से होता है—डॉलर महंगा मतलब रुपया कमजोर।
हाल ही में 1 डॉलर की कीमत 89 रुपये के आसपास पहुंच गई, जिसने आर्थिक बहस को तेज कर दिया है। लोग सवाल कर रहे हैं—
- रुपया इतना गिर क्यों रहा है?
- क्या पहले भी ऐसा होता था?
- मोदी सरकार में रुपये की गिरावट ज्यादा हुई या मनमोहन सिंह के समय?
आइए इसका पूरा तुलनात्मक विश्लेषण समझते हैं।
मोदी राज में रुपया कितना टूटा?
2014 में जब मोदी सरकार सत्ता में आई थी:
- 1 डॉलर = 58.58 रुपये
आज स्थिति:
- 1 डॉलर ≈ 89 रुपये
यानी करीब 52% से ज्यादा गिरावट।
सिर्फ एक साल में गिरावट
- सितंबर 2023: 1 डॉलर = 83.51 रुपये
- सितंबर 2024: 1 डॉलर = 88.74 रुपये
सिर्फ एक साल में ही 6% से ज्यादा कमजोरी।
यह बताता है कि हाल के वर्षों में रुपये पर दबाव काफी बढ़ा है।
मनमोहन काल में कितनी कमजोरी आई थी?
- 2004 में 1 डॉलर = 45.45 रुपये
- 2014 में 1 डॉलर = 58.58 रुपये
यानी पूरे 10 साल में लगभग 29% गिरावट।
कौन-सा दौर ज्यादा कमजोर साबित हुआ?
तुलना साफ है:
सरकार डॉलर रेट शुरुआत डॉलर रेट अंत कुल गिरावट
मनमोहन सरकार (2004–2014) ₹45.45 ₹58.58 ≈ 29% गिरावट
मोदी सरकार (2014–2024) ₹58.58 ≈ ₹89 ≈ 52% गिरावट
मोदी सरकार के 10 साल में रुपये की गिरावट मनमोहन सरकार की तुलना में लगभग दोगुनी रही है। यानी मौजूदा दौर में रुपये की कमजोरी का प्रभाव ज्यादा दिखाई देता है।
भारत का विदेशी कर्ज—कितना बढ़ा?
- 2014: 440.6 बिलियन डॉलर
- 2023: 613 बिलियन डॉलर
यानी विदेशी कर्ज में स्पष्ट वृद्धि।
फॉरेक्स रिज़र्व में मजबूत वृद्धि
हालाँकि विदेशी मुद्रा भंडार के मामले में मोदी सरकार ने बड़ी मजबूती दिखाई:
- 2014: 304.2 बिलियन डॉलर
- 2023: 595.98 बिलियन डॉलर
यानी लगभग दोगुना।
फॉरेक्स रिज़र्व बढ़ने का मतलब है कि देश के पास डॉलर की उपलब्धता ज्यादा है, जिससे संकट का जोखिम कम होता है।
Ease of Doing Business—बड़ा बदलाव
- मनमोहन सरकार में रैंक: 132–134
- मोदी सरकार में: 63
यानी कारोबार करने में आसानी के मामले में भारत ने बड़ी छलांग मारी।
- रुपया मोदी सरकार में मनमोहन सरकार की तुलना में कहीं ज्यादा टूटा है—लगभग दोगुनी गति से।
- हालांकि विदेशी मुद्रा भंडार, व्यापार वातावरण और निवेश माहौल में सुधार हुआ है, लेकिन रुपये की कमजोरी वैश्विक आर्थिक दबावों, आयात पर निर्भरता और डॉलर की बढ़ती ताकत के कारण जारी है।

