पश्चिम बंगाल में चुनावी झटके के बाद TMC में इस्तीफों का सिलसिला जारी है। सुष्मिता देव और शुखेंदु शेखर रॉय के बाद राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक ने भी इस्तीफा दे दिया। जानिए पूरी राजनीतिक हलचल।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। बंगाल चुनाव में झटका लगने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। इसी कड़ी में गुरुवार को टीएमसी के राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक ने भी अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया। इससे पहले पार्टी के वरिष्ठ नेता सुष्मिता देव और शुखेंदु शेखर रॉय भी राज्यसभा सदस्यता और पार्टी से इस्तीफा दे चुके हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगातार हो रहे ये इस्तीफे मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के लिए बड़ा राजनीतिक संकेत हैं, क्योंकि पार्टी के भीतर असंतोष की आवाजें अब खुलकर सामने आने लगी हैं।
प्रकाश चिक बराइक ने राज्यसभा से दिया इस्तीफा
सूत्रों के अनुसार, राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक जल्द ही राज्यसभा अध्यक्ष को अपना औपचारिक इस्तीफा सौंपेंगे। अपने त्यागपत्र में उन्होंने लिखा है:
“मैं राज्यसभा सदस्यता से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देता हूं। कृपया इसे स्वीकार किया जाए। मैं माननीय उपसभापति महोदय और राज्यसभा सचिवालय के सभी अधिकारियों का अपने कार्यकाल के दौरान मिले सहयोग और सहायता के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं।”
हालांकि, उन्होंने अपने इस्तीफे के पीछे किसी राजनीतिक कारण का सार्वजनिक रूप से उल्लेख नहीं किया है, लेकिन यह कदम ऐसे समय में आया है जब पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
सुष्मिता देव ने भी छोड़ी पार्टी और राज्यसभा
बुधवार को तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने राज्यसभा सदस्यता के साथ-साथ पार्टी से भी इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफे के तुरंत बाद उनकी मुलाकात असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma से हुई, जिसके बाद उनके भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं।
सुष्मिता देव ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से की थी। वह वर्ष 2014 में असम की सिलचर लोकसभा सीट से सांसद चुनी गई थीं। वर्ष 2021 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर टीएमसी का दामन थामा था। पार्टी ने उन्हें दो बार राज्यसभा भेजा, लेकिन उन्होंने कार्यकाल पूरा होने से पहले ही इस्तीफा दे दिया।
शुखेंदु शेखर रॉय ने भी जताई थी नाराजगी
इससे पहले 8 जून को टीएमसी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद Sukhendu Shekhar Roy ने पार्टी और राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।
इस्तीफे के दौरान उन्होंने पश्चिम बंगाल की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि राज्य की जनता ने भ्रष्टाचार, महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर टीएमसी से दूरी बना ली है।
TMC के लिए बढ़ रही चुनौती
लगातार हो रहे इस्तीफों ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ती असंतुष्टि को उजागर कर दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर पार्टी नेतृत्व जल्द ही संगठनात्मक स्तर पर बड़े फैसले नहीं लेता, तो यह असंतोष आगामी चुनावों में पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
हाल ही में ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में पार्टी की विभिन्न संगठनात्मक इकाइयों को भंग कर पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला लिया था। माना जा रहा है कि यह कदम पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी और संगठनात्मक कमजोरी को दूर करने के लिए उठाया गया है।
क्या बंगाल की राजनीति में आएगा बड़ा बदलाव?
प्रकाश चिक बराइक, सुष्मिता देव और शुखेंदु शेखर रॉय जैसे नेताओं के इस्तीफे ने बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह सिर्फ कुछ नेताओं की नाराजगी है या फिर टीएमसी के भीतर किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की शुरुआत।
आने वाले दिनों में ममता बनर्जी और पार्टी नेतृत्व की रणनीति यह तय करेगी कि तृणमूल कांग्रेस इस संकट से उबर पाती है या नहीं।

