प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक तनाव के बीच कहा कि समस्याओं का समाधान सैन्य टकराव नहीं, बल्कि संवाद और सहयोग से संभव है। जानें पूरा बयान।
नई दिल्ली | अंतरराष्ट्रीय डेस्क : वैश्विक तनाव के बीच भारत ने एक बार फिर शांति और संवाद का स्पष्ट संदेश दिया है। Narendra Modi ने नई दिल्ली के Hyderabad House में कहा कि किसी भी समस्या का समाधान सैन्य टकराव से नहीं, बल्कि बातचीत और सहयोग से निकल सकता है।
उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब दुनिया Ukraine युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव जैसे कई संकटों से जूझ रही है।
वैश्विक संकट पर भारत का स्पष्ट रुख
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा:
दुनिया इस समय गंभीर और तनावपूर्ण दौर से गुजर रही है
इसका असर हर देश की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर पड़ रहा है
ऐसे समय में संवाद और कूटनीति ही स्थायी समाधान हैं
उन्होंने दोहराया कि भारत हमेशा से शांति, स्थिरता और संतुलन की नीति पर चलता रहा है।
आतंकवाद पर सख्त रुख
जहां एक ओर पीएम मोदी ने संवाद पर जोर दिया, वहीं उन्होंने आतंकवाद पर सख्त रुख भी स्पष्ट किया:
- आतंकवाद को जड़ से खत्म करना जरूरी
- यह सिर्फ किसी एक देश नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की जिम्मेदारी
- सुरक्षा और शांति—दोनों के बीच संतुलन जरूरी
यह भारत की “शांति के साथ सुरक्षा” वाली नीति को दर्शाता है।
ऑस्ट्रिया के साथ बढ़ते रिश्ते
इस दौरान Christian Stocker के साथ हुई बैठक में भारत-ऑस्ट्रिया संबंधों को लेकर कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
प्रमुख बिंदु:
- द्विपक्षीय व्यापार करीब 3 बिलियन यूरो तक पहुंचा
- लगभग 160 ऑस्ट्रियाई कंपनियां भारत में सक्रिय
- इंफ्रास्ट्रक्चर, इनोवेशन और सस्टेनेबिलिटी पर सहयोग
शिक्षा और इनोवेशन में साझेदारी
प्रधानमंत्री मोदी ने Indian Institute of Technology Delhi और Montanuniversität Leoben के बीच हुए एमओयू को “ज्ञान साझेदारी” का मजबूत उदाहरण बताया।
- टेक्नोलॉजी और रिसर्च में सहयोग
- स्टूडेंट एक्सचेंज और इनोवेशन को बढ़ावा
- भविष्य के लिए नई संभावनाएं
- 🇮🇳 भारत-ऑस्ट्रिया संबंधों में नया अध्याय
पीएम मोदी ने कहा कि:
- चार दशकों बाद ऑस्ट्रिया के चांसलर की भारत यात्रा ऐतिहासिक है
- European Union के साथ भारत के बढ़ते संबंधों से नए अवसर बन रहे हैं
- भारत का टैलेंट और ऑस्ट्रिया की टेक्नोलॉजी मिलकर वैश्विक स्तर पर असर डाल सकती है
क्यों अहम है पीएम मोदी का बयान?
विशेषज्ञों के अनुसार यह बयान कई मायनों में महत्वपूर्ण है:
- वैश्विक मंच पर भारत की शांति-प्रधान छवि को मजबूत करता है
- युद्ध और टकराव के बीच डायलॉग की जरूरत पर जोर
- भारत की संतुलित विदेश नीति का संकेत
Narendra Modi का यह संदेश केवल एक बयान नहीं, बल्कि वैश्विक कूटनीति में भारत की स्पष्ट दिशा को दर्शाता है। जहां दुनिया टकराव की ओर बढ़ रही है, वहां भारत संवाद, सहयोग और स्थायी शांति का रास्ता दिखाने की कोशिश कर रहा है।

