भारत में LPG सप्लाई पर संकट गहराया। आयात 50% घटा और घरेलू उत्पादन में 10% गिरावट। जानें इसके पीछे की वजह और कब तक सुधरेगी स्थिति।
नई दिल्ली | बिजनेस डेस्क: भारत में लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) की सप्लाई पर अप्रैल 2026 में गंभीर दबाव देखने को मिल रहा है। घरेलू उत्पादन में गिरावट और आयात में तेज कमी ने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि Strait of Hormuz में जारी तनाव और United States-Iran टकराव इसका मुख्य कारण है।
आधा हुआ LPG आयात, बढ़ी चिंता
ताजा आंकड़ों के मुताबिक:
- 1 अप्रैल से 14 अप्रैल के बीच भारत ने रोजाना लगभग 37,000 टन LPG आयात किया
- फरवरी में यह आंकड़ा करीब 73,000 टन प्रतिदिन था
- यानी आयात लगभग 50% तक घट गया
हालांकि United States भारत का बड़ा सप्लायर बनकर उभरा है, फिर भी देश की आधे से ज्यादा LPG जरूरतें खाड़ी देशों से पूरी होती हैं।
घरेलू उत्पादन में भी गिरावट
सिर्फ आयात ही नहीं, बल्कि देश के भीतर LPG उत्पादन भी प्रभावित हुआ है।
- मार्च के मुकाबले उत्पादन में करीब 10% की कमी
- बढ़ती मांग के बीच सप्लाई और कमजोर
इससे बाजार में दबाव और बढ़ गया है।
क्यों बढ़ा LPG संकट?
इस संकट के पीछे कई अहम वजहें हैं:
1. भू-राजनीतिक तनाव
United States और Iran के बीच बढ़ते तनाव ने ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है।
2. होर्मुज जलडमरूमध्य पर असर
दुनिया की बड़ी मात्रा में LPG और कच्चा तेल Strait of Hormuz के जरिए ट्रांसपोर्ट होता है। यहां रुकावट से सप्लाई चेन बाधित हो गई है।
3. लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट की बाध्यता
- LPG का बड़ा हिस्सा पहले से तय कॉन्ट्रैक्ट्स में बंधा होता है
- स्पॉट मार्केट में तुरंत खरीद के लिए सीमित विकल्प
4. बढ़ती घरेलू मांग
- उज्ज्वला योजना और शहरी खपत में वृद्धि
- सप्लाई घटने के बीच मांग लगातार बढ़ रही
कब तक सुधरेगी स्थिति?
रिपोर्ट्स के अनुसार:
- सप्लाई सामान्य होने में कम से कम 2-3 साल लग सकते हैं
- आयात स्रोतों में बदलाव (Diversification) जारी है
- खाड़ी देशों पर निर्भरता अभी भी बहुत ज्यादा
भारत की LPG निर्भरता
- कुल खपत का लगभग 60% आयात से पूरा होता है
- युद्ध से पहले 90% सप्लाई होर्मुज के रास्ते आती थी
- अब यह घटकर करीब 55% रह गई है
यह बदलाव बताता है कि भारत वैकल्पिक स्रोत खोजने की कोशिश कर रहा है।
व्यापक असर: सिर्फ LPG नहीं, पूरी अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
- घरेलू गैस की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी
- महंगाई पर दबाव
- उद्योग और घरेलू उपयोग दोनों प्रभावित
- ऊर्जा सुरक्षा पर दीर्घकालिक खतरा
आगे का रास्ता
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को:
- वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों (Renewable Energy) पर जोर देना होगा
- सप्लाई चैन को विविध बनाना होगा
- रणनीतिक भंडारण क्षमता बढ़ानी होगी
भारत में LPG सप्लाई संकट केवल एक अस्थायी समस्या नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा अस्थिरता का संकेत है। Strait of Hormuz में तनाव और वैश्विक राजनीति के चलते आने वाले समय में ऊर्जा सुरक्षा भारत के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक बन सकती है।

