Faridabad Illegal Colonies: फरीदाबाद में अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई के दौरान लद्दाख में तैनात सेना के नायब सूबेदार रामकुमार का निर्माणाधीन मकान बुलडोजर से तोड़ दिया गया। परिवार ने बिना नोटिस कार्रवाई और पुलिस दुर्व्यवहार के आरोप लगाए।
फरीदाबाद: हरियाणा के फरीदाबाद जिले में अवैध कॉलोनियों के खिलाफ चलाए जा रहे प्रशासनिक अभियान के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। साहुपुरा गांव की राजस्व सीमा में की गई तोड़फोड़ कार्रवाई के दौरान भारतीय सेना में कार्यरत नायब सूबेदार रामकुमार का निर्माणाधीन मकान भी बुलडोजर की जद में आ गया।
घटना के समय रामकुमार लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर तैनात थे, जबकि उनका परिवार फरीदाबाद में मौजूद था। मकान टूटते देख उनकी पत्नी रेखा चौहान मौके पर फूट-फूटकर रो पड़ीं और प्रशासन से कार्रवाई रोकने की अपील करती रहीं।
37 लाख रुपये का निवेश कुछ ही मिनटों में मलबे में तब्दील
परिवार के अनुसार, 97 गज के इस प्लॉट को करीब 25 लाख रुपये में खरीदा गया था। वहीं मकान निर्माण पर अब तक लगभग 12 लाख रुपये खर्च किए जा चुके थे। इस तरह कुल मिलाकर करीब 37 लाख रुपये का निवेश कुछ ही समय में मलबे में बदल गया।
रेखा चौहान ने बताया कि मकान का निर्माण लगभग एक वर्ष पहले शुरू किया गया था और अभी भी काम जारी था।
“मेरे पति देश की सेवा कर रहे हैं और हमारा घर टूट गया”
रेखा चौहान ने बताया कि उनके पति रामकुमार भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर कार्यरत हैं और वर्तमान में लद्दाख में तैनात हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान विरोध करने पर महिला पुलिसकर्मियों ने उनके साथ धक्का-मुक्की की, जिससे उनके हाथ और सिर में चोटें आईं।
उनका कहना है कि उन्होंने केवल इतना अनुरोध किया था कि जो हिस्सा बचा है उसे छोड़ दिया जाए, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई।
परिवार का दावा—कोई नोटिस नहीं मिला
रामकुमार की मां रामवती ने प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि परिवार के पास जमीन खरीद से संबंधित सभी दस्तावेज मौजूद हैं। उन्होंने दावा किया कि रजिस्ट्री प्रक्रिया उस समय बंद होने के कारण रजिस्ट्री नहीं हो सकी थी।
रामवती ने कहा कि मकान तोड़ने से पहले उन्हें किसी प्रकार का नोटिस नहीं दिया गया। उन्होंने बताया कि उनके दो बेटे सेना में रहे हैं, जिनमें से एक देश सेवा के दौरान शहीद हो चुका है, जबकि रामकुमार आज भी सीमा पर तैनात होकर देश की रक्षा कर रहे हैं।
बेटी ने सुनाई परिवार की पीड़ा
रामकुमार की बेटी इंजल चौहान ने बताया कि उनका परिवार करीब दो साल पहले साहुपुरा क्षेत्र में आकर बसा था। परिवार ने वर्षों की बचत से अपना घर बनाने का फैसला किया था।
इंजल के अनुसार, उनकी मां रेखा चौहान ब्रेन ट्यूमर की मरीज हैं और उनका ऑपरेशन हो चुका है। उन्होंने दावा किया कि विरोध के दौरान पुलिसकर्मियों ने उनकी मां को जमीन पर गिरा दिया, जबकि वह लगातार अपनी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में बता रही थीं।
रजिस्ट्री प्रक्रिया में थी देरी
परिवार का कहना है कि जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए आवेदन और आवश्यक शुल्क पहले ही जमा कराए जा चुके थे, लेकिन प्रशासनिक प्रक्रिया में देरी चल रही थी। इसी बीच बुलडोजर कार्रवाई ने उनके सपनों के आशियाने को ध्वस्त कर दिया।
प्रशासन की कार्रवाई पर उठे सवाल
घटना के बाद स्थानीय स्तर पर यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर प्रशासन अवैध कॉलोनियों के खिलाफ अभियान चला रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित परिवारों का आरोप है कि उन्हें पर्याप्त सूचना और कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना कार्रवाई का सामना करना पड़ा।
हालांकि प्रशासन की ओर से इस मामले पर विस्तृत आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है।
देश सेवा और परिवार का संघर्ष
यह घटना केवल एक निर्माणाधीन मकान के टूटने की कहानी नहीं है, बल्कि उस परिवार के संघर्ष को भी सामने लाती है, जिसका एक सदस्य सीमाओं पर देश की सुरक्षा में जुटा है। परिवार का कहना है कि वर्षों की मेहनत और बचत से तैयार हो रहा उनका घर एक झटके में खत्म हो गया।
अब परिवार प्रशासन से न्याय और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।

