अमेरिका–वेनेजुएला तनाव चरम पर पहुंच गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने कैरेबियन में 15,000 सैनिक और युद्धपोत तैनात किए हैं। जानें क्यों सैन्य कार्रवाई कभी भी शुरू हो सकती है और वेनेजुएला कैसे कर रहा है जवाबी तैयारी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। अब हालात और गंभीर हो गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप प्रशासन ने कैरेबियन क्षेत्र में 15,000 अमेरिकी सैनिकों और एक दर्जन से अधिक युद्धपोतों की तैनाती कर दी है। माना जा रहा है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाने के लिए किसी भी वक्त सैन्य कार्रवाई का आदेश दिया जा सकता है।
अमेरिकी न्यूज़ नेटवर्क CNN की रिपोर्ट में बताया गया है कि ट्रंप को इस हफ्ते कई उच्च-स्तरीय ब्रीफिंग दी गई हैं, जिनमें वेनेजुएला पर संभावित सैन्य ऑपरेशन के विकल्पों पर चर्चा हुई है। इस ऑपरेशन का नाम “Southern Spear” बताया जा रहा है।
ट्रंप बोले—“मैंने अपना मन बना लिया है”
Air Force One में प्रेस से बात करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा—
“मैंने अपना मन बना लिया है… मैं अभी आपको नहीं बता सकता कि क्या होने वाला है, लेकिन फैसला लगभग तय है।”
CNN की रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा सचिव पीट हेगसेथ, ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने राष्ट्रपति को वेनेजुएला में कार्रवाई के कई विकल्पों की जानकारी दी, जिनमें शामिल हैं:
- वेनेजुएला के सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक
- सरकारी प्रतिष्ठानों पर हमला
- ड्रग तस्करी मार्गों को निशाना बनाना
- सीधे राष्ट्रपति मादुरो पर कार्रवाई
कैरेबियन में महाशक्ति की तैनाती
अमेरिका ने दुनिया के सबसे बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर USS Gerald R. Ford को कैरेबियन में तैनात कर दिया है। इसके साथ ही:
- 15,000 से अधिक सैनिक
- एक दर्जन से ज्यादा युद्धपोत
- क्रूजर और डेस्ट्रॉयर
- Amphibious Assault Ships
- एक अटैक सबमरीन
इन सभी की मौजूदगी साफ संकेत देती है कि अमेरिका सिर्फ दबाव नहीं बना रहा, बल्कि वास्तविक सैन्य हस्तक्षेप की तैयारी कर चुका है।
वेनेजुएला की प्रतिक्रिया
अमेरिका की तैयारियों के बीच वेनेजुएला ने भी बड़े पैमाने पर सैनिकों और हथियारों की तैनाती शुरू कर दी है। देश ने सैन्य उपकरणों और फोर्स को जुटाने का आदेश दिया है।
हालात ऐसे बन गए हैं कि दोनों देशों के बीच सीधा सैन्य टकराव कभी भी शुरू हो सकता है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है।

