UPI MDR Charge: 15 अक्टूबर से UPI चार्ज लागू हुआ तो व्यापारी करेंगे बहिष्कार? CTI ने दी चेतावनी

UPI MDR Charge: CTI ने चेतावनी दी है कि 15 अक्टूबर से UPI MDR लागू हुआ तो व्यापारी बहिष्कार कर सकते हैं। वित्त मंत्री से शुल्क वापस लेने की मांग, जानें नई अपडेट।

UPI MDR Charge News: UPI पेमेंट पर प्रस्तावित MDR शुल्क को लेकर व्यापारियों का विरोध तेज हो गया है। दिल्ली के व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने चेतावनी दी है कि अगर 15 अक्टूबर से UPI MDR शुल्क लागू हुआ, तो व्यापारी इसके विरोध में UPI पेमेंट का पूर्ण बहिष्कार करने पर विचार कर सकते हैं। CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर प्रस्तावित शुल्क वापस लेने की मांग की है। इस बीच, 8 अक्टूबर की रिपोर्टों के मुताबिक, शुल्क लागू करने की तारीख जनवरी 2027 तक टालने पर भी विचार किया जा रहा है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम फैसले की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। (NDTV, Reuters)

UPI चार्ज को लेकर क्यों नाराज हैं व्यापारी?

UPI आज देश में डिजिटल भुगतान का प्रमुख माध्यम बन चुका है। किराना दुकानों, कपड़ों और जूतों की दुकानों से लेकर रेस्टोरेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स स्टोर और छोटे कारोबारियों तक बड़ी संख्या में लोग डिजिटल पेमेंट स्वीकार करते हैं।

व्यापारियों का कहना है कि UPI पर अतिरिक्त शुल्क लगने से कारोबार की लागत बढ़ सकती है। खासकर छोटे और मध्यम व्यापारियों को चिंता है कि कम मार्जिन वाले कारोबार में भुगतान से जुड़ा अतिरिक्त खर्च उनकी कमाई को प्रभावित कर सकता है।

CTI का तर्क है कि जब सरकार डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दे रही है, तो ऐसी व्यवस्था नहीं होनी चाहिए जिससे व्यापारियों को UPI स्वीकार करने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाना पड़े।

15 अक्टूबर से UPI बहिष्कार की चेतावनी

CTI ने स्पष्ट किया है कि अगर 15 अक्टूबर से प्रस्तावित MDR शुल्क लागू किया जाता है, तो संगठन इसके विरोध में UPI पेमेंट के पूर्ण बहिष्कार का कदम उठा सकता है।

संगठन का कहना है कि UPI का इस्तेमाल केवल बड़े कारोबार तक सीमित नहीं है। छोटे दुकानदारों और स्ट्रीट वेंडर्स के लिए भी यह ग्राहकों से भुगतान लेने का आसान माध्यम है।

हालांकि, फिलहाल इसे CTI की चेतावनी के तौर पर देखा जाना चाहिए। देशभर के सभी व्यापारियों की ओर से UPI बहिष्कार का कोई एकसमान फैसला घोषित होने की पुष्टि नहीं हुई है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को लिखा पत्र

CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर प्रस्तावित UPI MDR शुल्क वापस लेने की मांग की है।

व्यापारिक संगठन ने सरकार से अपील की है कि 15 अक्टूबर से लागू होने वाली व्यवस्था पर दोबारा विचार किया जाए और व्यापारियों को अतिरिक्त लागत से राहत दी जाए।

CTI का मानना है कि UPI को कम लागत वाला और सुलभ भुगतान माध्यम बनाए रखना जरूरी है। संगठन को आशंका है कि अतिरिक्त शुल्क से बड़े भुगतान के लिए डिजिटल माध्यम के बजाय नकद भुगतान की ओर रुझान बढ़ सकता है। (NDTV)

आखिर क्या है UPI MDR शुल्क?

MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो पात्र डिजिटल भुगतान लेनदेन को स्वीकार करने पर व्यापारी पक्ष के भुगतान तंत्र में लागू होता है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत चुनिंदा मर्चेंट UPI लेनदेन पर शुल्क लगाने की बात कही गई है।

15 अक्टूबर से लागू होने वाली प्रस्तावित व्यवस्था के बारे में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, ₹2,000 से अधिक के पात्र व्यक्ति-से-व्यापारी (Person-to-Merchant) UPI लेनदेन पर 0.4% MDR निर्धारित किया गया है। ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर शुल्क की अधिकतम सीमा ₹300 बताई गई है। (Reuters)

यह शुल्क हर UPI भुगतान पर लागू नहीं होगा। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) भुगतान और ₹2,000 तक के मर्चेंट भुगतान के साथ छोटे व्यापारियों की कुछ पात्र श्रेणियों को छूट मिलेगी। सरकार ने यह भी कहा है कि आम ग्राहकों से UPI भुगतान के लिए अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। (वित्त मंत्रालय/PIB)

क्या 15 अक्टूबर से लागू होगा UPI चार्ज?

इस मामले में अब एक नया मोड़ सामने आया है। 8 अक्टूबर को प्रकाशित Reuters और अन्य मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित MDR व्यवस्था को 15 अक्टूबर से लागू करने के बजाय जनवरी 2027 तक टालने पर विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य भुगतान कंपनियों, बैंकों और व्यापारियों को नई व्यवस्था के लिए तैयारी का अधिक समय देना बताया गया है।

हालांकि, तारीख टालने के प्रस्ताव पर अंतिम आधिकारिक निर्णय की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में व्यापारियों और भुगतान सेवा प्रदाताओं की नजर सरकार तथा संबंधित संस्थाओं की अगली घोषणा पर रहेगी। (Reuters, Financial Express)

आगे क्या होगा?

UPI MDR शुल्क पर सरकार और व्यापारियों के बीच मतभेद का मुख्य मुद्दा यह है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को टिकाऊ बनाने के लिए भुगतान तंत्र की लागत कैसे पूरी की जाए, जबकि व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ भी न पड़े।

CTI ने शुल्क वापस लेने की मांग करते हुए बहिष्कार की चेतावनी दी है। अब यह देखना होगा कि सरकार प्रस्तावित व्यवस्था में कोई बदलाव करती है या लागू करने की तारीख आगे बढ़ाई जाती है।

फिलहाल व्यापारियों के लिए सबसे अहम सवाल यही है—क्या 15 अक्टूबर से MDR लागू होगा, या सरकार विरोध के बीच इसे टालने का फैसला करेगी?