अफ्रीका में भारतीयों की सुरक्षा पर संकट गहरा! सूडान के बाद अब माली में 5 भारतीयों का अपहरण

पश्चिमी अफ्रीकी देश माली से भारतीय नागरिकों के लिए चिंताजनक खबर आई है। यहां गुरुवार को अज्ञात हथियारबंद आतंकियों ने पांच भारतीयों का अपहरण कर लिया। बताया जा रहा है कि ये सभी एक बिजलीकरण परियोजना (Electrification Project) पर काम कर रहे थे। घटना कोबरी (Kobri) क्षेत्र के पास हुई। कंपनी और सुरक्षा एजेंसियों ने इस अपहरण की पुष्टि की है।

कंपनी के एक अधिकारी के अनुसार—

“हमारे पांच भारतीय कर्मचारियों को अज्ञात बंदूकधारियों ने अगवा कर लिया है। अन्य भारतीयों को सुरक्षित राजधानी बमाको पहुंचा दिया गया है।”

फिलहाल इस अपहरण की जिम्मेदारी किसी संगठन ने नहीं ली है, लेकिन माली में अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट (ISIS) से जुड़े आतंकवादी समूह सक्रिय हैं। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि इस घटना के पीछे इन्हीं में से किसी संगठन का हाथ हो सकता है।

अशांत है माली, आतंकियों का दबदबा

माली इस समय सैन्य शासन (Military Junta) के अधीन है और देश के कई हिस्से जिहादी संगठनों के प्रभाव में हैं।
विशेष रूप से ग्रुप फॉर द सपोर्ट ऑफ इस्लाम एंड मुस्लिम्स (JNIM) नामक संगठन देश में ईंधन आपूर्ति पर नाकेबंदी और हिंसा की घटनाओं को अंजाम दे रहा है।

सूडान में भी हुआ था भारतीय का अपहरण

इस घटना ने अफ्रीका में भारतीयों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ा दी हैं।
कुछ दिन पहले सूडान में भी भारतीय नागरिक आदर्श बेहेरा (ओडिशा निवासी) को अपहरण कर लिया गया था।
उन्हें रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) नामक मिलिशिया समूह ने बंधक बनाया।

सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में आदर्श दो हथियारबंद लोगों के बीच बैठे दिखाई देते हैं।
उनसे शाहरुख खान का नाम पूछने और RSF प्रमुख मोहम्मद हामदान डगालो (हेमेती) के समर्थन में बोलने के लिए मजबूर किया गया।

परिवार के अनुसार, 36 वर्षीय आदर्श 2022 से सूडान में एक प्लास्टिक फैक्ट्री में काम कर रहे थे, जबकि उनकी पत्नी और दो बच्चे ओडिशा में रहते हैं।

सरकार की चिंता बढ़ी

दो देशों में कम समय में भारतीयों के अपहरण की घटनाओं ने विदेश मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता बढ़ा दी है।
माली और सूडान दोनों ही क्षेत्र युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता और आतंकवाद से जूझ रहे हैं।

भारतीय दूतावास लगातार स्थानीय प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के संपर्क में है।

हालात फिलहाल गंभीर हैं और दोनों ही मामलों में सरकारी स्तर पर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं।