बंगाल में SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CJI की ममता सरकार को फटकार

पश्चिम बंगाल के मालदा में SIR के दौरान जजों पर हमले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CJI सूर्यकांत ने ममता सरकार को लगाई फटकार। जानें पूरा मामला।

पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान न्यायिक अधिकारियों पर हुए हमले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (CJI) ने इस मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को तीखी फटकार लगाई और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए।

क्या है पूरा मामला?

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के कालिचाक क्षेत्र में SIR के तहत वोटर लिस्ट की जांच का काम चल रहा था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने दोपहर 3:30 बजे से लेकर रात तक करीब 9 घंटे तक सात न्यायिक अधिकारियों—जिनमें तीन महिला अधिकारी भी शामिल थीं—को बंधक बनाकर रखा। जब अधिकारी वहां से निकलने लगे तो उन पर पथराव भी किया गया।

यह अधिकारी उन लगभग 50 लाख लोगों के दावों और आपत्तियों की जांच कर रहे थे, जिन्हें अंतिम वोटर लिस्ट से बाहर किया गया था।

CJI की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने पश्चिम बंगाल सरकार के वकील को फटकार लगाते हुए कहा,
“दुर्भाग्य से आपके राज्य में हर अधिकारी राजनीतिक भाषा बोलता है। क्या आप समझते हैं कि हमें पता नहीं है कि उपद्रवी कौन थे?”

उन्होंने यह भी बताया कि वे खुद देर रात 2 बजे तक हालात पर नजर बनाए हुए थे और न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मौखिक निर्देश देने पड़े।

प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल

CJI ने राज्य प्रशासन की धीमी प्रतिक्रिया पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि रात 11 बजे तक जिला प्रशासन के अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे, जो बेहद चिंताजनक है। बाद में कलकत्ता हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद पुलिस सक्रिय हुई और अधिकारियों को सुरक्षित निकाला गया।

चुनाव आयोग और केंद्र की प्रतिक्रिया

इस घटना पर चुनाव आयोग ने भी कड़ी आपत्ति जताई है। आयोग के वकील दामा सेशाद्री नायडू ने कहा कि लोकतंत्र में भीड़तंत्र स्वीकार्य नहीं है।

वहीं, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसे “अस्वीकार्य” घटना बताया और कहा कि जब न्यायिक अधिकारियों को खुद कोर्ट के आदेश पर तैनात किया गया था, तब उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य की जिम्मेदारी थी।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

यह घटना केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सुरक्षा से भी जुड़ी हुई है। वोटर लिस्ट का पुनरीक्षण चुनाव प्रणाली की पारदर्शिता के लिए बेहद अहम होता है। ऐसे में न्यायिक अधिकारियों पर हमला चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करता है।

आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और राज्य सरकार से जवाब तलब कर सकता है। संभावना है कि कोर्ट सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्त निर्देश जारी करे, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।