NCERT की कक्षा-8 की किताब पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: CJI सूर्यकांत बोले—न्यायपालिका को बदनाम करने की अनुमति नहीं

NCERT की कक्षा-8 की नई किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ अध्याय पर सुप्रीम कोर्ट सख्त। CJI सूर्यकांत ने जल्द सुनवाई का दिया आश्वासन। जानिए पूरा मामला।

NCERT Book Controversy 2026: आठवीं कक्षा की नई सोशल साइंस पुस्तक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ पर अध्याय शामिल किए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा है कि न्यायपालिका को बदनाम करने की अनुमति किसी को भी नहीं दी जाएगी और मामले की जल्द सुनवाई की जाएगी।

क्या है पूरा मामला?

सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने इस मुद्दे को उठाया।

इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा,

“मैंने मामले पर संज्ञान लिया है। पूरे देश में वकील और जज चिंतित हैं। न्यायपालिका के प्रमुख के रूप में मैं अपनी भूमिका निभाऊंगा।”

किताब में क्या लिखा है?

नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) की कक्षा-8 की सोशल साइंस की नई पुस्तक में न्यायपालिका से जुड़ी चुनौतियों का उल्लेख किया गया है।

‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ शीर्षक अध्याय में कहा गया है कि:

  • न्यायिक प्रणाली के सामने भ्रष्टाचार एक चुनौती है।
  • लंबित मुकदमों की बड़ी संख्या व्यवस्था पर दबाव डालती है।
  • जजों की पर्याप्त संख्या न होना भी एक गंभीर समस्या है।

किताब में न्यायपालिका की आचार संहिता, आंतरिक जवाबदेही तंत्र और पारदर्शिता बढ़ाने के प्रयासों का भी जिक्र है।

लंबित मामलों के आंकड़े

पुस्तक के अनुसार:

  • सुप्रीम कोर्ट में लगभग 81,000 मामले लंबित हैं।
  • हाईकोर्ट्स में करीब 62.40 लाख मामले लंबित हैं।
  • जिला और अधीनस्थ न्यायालयों में लगभग 4.70 करोड़ मामले लंबित हैं।

इसके साथ ही केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (CPGRAMS) के माध्यम से 2017 से 2021 के बीच 1,600 से अधिक शिकायतें प्राप्त होने का भी उल्लेख किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट की आपत्ति

जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने इस अध्याय को संविधान की मूल संरचना पर हमला बताया है। अदालत का मानना है कि इस तरह की सामग्री से न्यायपालिका की छवि प्रभावित हो सकती है।

CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस विषय पर जल्द सुनवाई होगी।

पूर्व CJI बी.आर. गवई का उल्लेख

पुस्तक में पूर्व मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई का भी उल्लेख किया गया है। जुलाई 2025 में उन्होंने कहा था कि न्यायपालिका के भीतर भ्रष्टाचार या कदाचार की घटनाएं जनता के विश्वास को प्रभावित करती हैं, लेकिन पारदर्शी और त्वरित कार्रवाई से भरोसा बहाल किया जा सकता है।

पुरानी और नई किताब में अंतर

पुराने संस्करण में मुख्य रूप से न्यायालयों की संरचना और भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया गया था। नई पुस्तक में न्यायपालिका के समक्ष चुनौतियों और जवाबदेही तंत्र पर भी चर्चा जोड़ी गई है।

आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि मामले की शीघ्र सुनवाई होगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत इस विषय में NCERT को क्या निर्देश देती है और क्या पुस्तक के विवादित अंश में संशोधन किया जाएगा।

NCERT की कक्षा-8 की पुस्तक में न्यायपालिका से जुड़ी चुनौतियों का उल्लेख एक शैक्षणिक बहस का विषय बन गया है। जहां एक ओर पारदर्शिता और जवाबदेही की बात की गई है, वहीं सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका की गरिमा और प्रतिष्ठा की रक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है। आने वाले दिनों में इस मामले पर बड़ा फैसला सामने आ सकता है।