बांग्लादेश की अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को निहत्थे नागरिकों पर गोली चलाने और मानवता के खिलाफ अपराध में दोषी ठहराया। कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई। जानें पूरी रिपोर्ट, गवाहों के बयान और ICT का फैसला।
बांग्लादेश की राजनीति में भूचाल लाने वाले बड़े फैसले में अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को निहत्थे नागरिकों और प्रदर्शनकारी छात्रों पर गोली चलाने के मामले में मानवता के विरुद्ध अपराध का दोषी करार दिया है। अदालत ने कठोर टिप्पणी करते हुए उन्हें फांसी की सजा सुनाई।
न्यायालय के अनुसार, शेख हसीना ने शांतिपूर्ण और निहत्थे प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए न केवल पुलिस बल का दुरुपयोग किया, बल्कि ड्रोन, घातक हथियार और आक्रामक रणनीतियों के इस्तेमाल का भी आदेश दिया था।
कोर्ट की सख्त टिप्पणियाँ: “हसीना ने जानबूझकर नागरिकों पर हिंसा करवाई”
ICT के मुख्य न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा:
- हसीना ने विरोध कर रहे छात्रों और नागरिकों को मारने के लिए प्रत्यक्ष निर्देश जारी किए।
- ढाका विश्वविद्यालय के कुलपति के साथ उनकी फोन बातचीत में हिंसक कार्रवाई के स्पष्ट आदेशों की पुष्टि हुई।
- उनके आदेश अपमानजनक, उकसाने वाले और हिंसा को बढ़ावा देने वाले थे।
- अवामी लीग के समर्थक भी हसीना सरकार के निर्देशों पर प्रदर्शनकारियों को टार्गेट कर रहे थे।
कोर्ट के अनुसार यह कोई आकस्मिक घटना नहीं, बल्कि पूर्वनियोजित और संगठित कार्रवाई थी।
54 गवाहों के बयान और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के आधार पर फैसला
न्यायाधिकरण ने कुल 54 गवाहों के बयान सुने। सबूतों में शामिल थे:
- प्रत्यक्षदर्शियों के बयान
- पुलिस अधिकारियों के दस्तावेज
- संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी की रिपोर्ट
- सरकारी बैठकों के रिकॉर्ड
- फोन कॉल रिकॉर्डिंग
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि:
“शेख हसीना और तत्कालीन गृह मंत्रालय के आदेश पर ही व्यापक मानवाधिकार उल्लंघन हुए।”
आईजीपी की स्वीकारोक्ति भी आई सामने
जांच में पुलिस महानिरीक्षक (IGP) ने पूछताछ के दौरान अपनी संलिप्तता स्वीकार की। कोर्ट ने बताया कि:
- 19 जुलाई के बाद गृह मंत्री के आवास पर लगातार बैठकें हुईं।
- इन बैठकों में छात्र आंदोलन को ‘बंद’ करने, ‘नियंत्रण में लाने’ और ‘किसी भी कीमत पर रोकने’ के आदेश दिए गए।
इन बैठकों के दस्तावेज अदालत में सबूत के रूप में प्रस्तुत किए गए।
ड्रोन और हथियारों का इस्तेमाल—सबूतों ने खोली पूरी सच्चाई
अदालत ने पाया कि:
- भीड़ पर गोलीबारी
- ड्रोन से आक्रामक गैस और हथियारों का उपयोग
- महिलाओं और छात्रों पर अत्यधिक बल प्रयोग
ये सभी काम सरकारी मशीनरी के निर्देश पर किए गए।
इसी आधार पर न्यायाधिकरण ने इसे मानवता के खिलाफ घोर अपराध घोषित किया।
ICT का निष्कर्ष: “आदेश शीर्ष स्तर से आए—जिम्मेदारी शेख हसीना की”
फैसले में लिखा गया:
- हसीना ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया।
- विरोध दबाने के लिए गैरकानूनी और अमानवीय आदेश जारी किए।
- नागरिकों को जानबूझकर टार्गेट किया गया।
- यह घटना मानवाधिकारों का बर्बर उल्लंघन है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल—आने वाले दिनों में बढ़ सकती है राजनीतिक उथल-पुथल
इस फैसले ने बांग्लादेश में राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां इस मसले पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं। विश्लेषकों के अनुसार आने वाले दिनों में:
- देश में राजनीतिक अस्थिरता
- अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएँ
- अवामी लीग की रणनीति में बदलाव
देखने को मिल सकता है।

