Railway Projects: रेलवे के 7 हाई-डेंसिटी कॉरिडोर को मंजूरी, 5 राज्यों में बढ़ेगी रेल कनेक्टिविटी; जानें पूरी डिटेल

Railway Projects: मोदी कैबिनेट ने रेलवे के 7 हाई-डेंसिटी कॉरिडोर से जुड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी। 5 राज्यों के 14 जिलों में 656 KM रेल नेटवर्क बढ़ने और 56 लाख लोगों को फायदा होने की उम्मीद है।

Railway Projects: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में रेलवे के हाई-डेंसिटी नेटवर्क से जुड़े सात महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई। इन परियोजनाओं के जरिए पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में रेल नेटवर्क का विस्तार होगा। सरकार के मुताबिक, इससे करीब 56 लाख लोगों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है।

नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार, 9 सितंबर 2026 को हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में रेलवे से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार ने रेलवे के हाई-डेंसिटी कॉरिडोर को मजबूत और विस्तारित करने से जुड़े सात प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है।

इन परियोजनाओं का उद्देश्य देश के उन रेल मार्गों की क्षमता बढ़ाना है, जहां पहले से भारी यातायात है और आने वाले समय में ट्रैफिक बढ़ने की संभावना है।

कौन-कौन से रेलवे प्रोजेक्ट्स को मिली मंजूरी?

सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, मंजूर परियोजनाओं में प्रमुख रूप से खड़गपुर-ज्हारसुगुड़ा, अरक्कोनम-रेनिगुंटा और बिलासपुर-कटनी जैसे महत्वपूर्ण रेल सेक्शन शामिल हैं।

खड़गपुर से झारसुगुड़ा के बीच चौथी रेल लाइन को मंजूरी दी गई है। इस परियोजना की लंबाई करीब 367 किलोमीटर होगी और इसकी अनुमानित लागत 6,528 करोड़ रुपये बताई गई है।

वहीं अरक्कोनम से रेनिगुंटा के बीच तीसरी और चौथी रेल लाइन से जुड़े प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दी गई है। यह सेक्शन करीब 77 किलोमीटर लंबा होगा और इस पर लगभग 1,936 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

इसके अलावा हाई-डेंसिटी नेटवर्क में दिल्ली-मुंबई, मुंबई-चेन्नई, चेन्नई-कोलकाता और कोलकाता-दिल्ली जैसे प्रमुख मार्गों को मजबूत करने की योजना का भी उल्लेख किया गया है।

क्या है हाई-डेंसिटी रेलवे नेटवर्क?

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, देश के कुछ चुनिंदा रेल कॉरिडोर पर रेलवे के कुल ट्रैफिक का बड़ा हिस्सा चलता है। ऐसे मार्गों पर यात्री और मालगाड़ियों की संख्या अधिक होने के कारण अतिरिक्त ट्रैक बिछाने की जरूरत लगातार बढ़ रही है।

सरकार इन महत्वपूर्ण कॉरिडोर को चरणबद्ध तरीके से चार ट्रैक/चार-लाइन क्षमता वाले नेटवर्क में बदलने पर काम कर रही है।

इनमें दिल्ली-मुंबई, मुंबई-चेन्नई, चेन्नई-कोलकाता और कोलकाता-दिल्ली का नेटवर्क एक तरह से गोल्डन क्वाड्रिलैटरल का हिस्सा बनता है। इसके साथ दिल्ली-चेन्नई और मुंबई-कोलकाता जैसे डायगोनल कॉरिडोर तथा दिल्ली-गुवाहाटी रूट को भी हाई-डेंसिटी नेटवर्क के व्यापक विस्तार से जोड़ा गया है।

11 हजार KM के हाई-डेंसिटी कॉरिडोर पर फोकस

अश्विनी वैष्णव ने बताया कि करीब 11,000 किलोमीटर के हाई-डेंसिटी कॉरिडोर में सात प्रमुख कॉरिडोर ऐसे हैं, जहां रेलवे के लगभग 40 फीसदी ट्रैफिक का आवागमन होता है।

सरकार के मुताबिक, इनमें से करीब 2,000 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका है और वहां चार लाइनें उपलब्ध हैं। लगभग 5,000 किलोमीटर पर काम चल रहा है या उसे मंजूरी मिल चुकी है, जबकि बाकी करीब 4,000 किलोमीटर के लिए DPR तैयार करने और अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया चल रही है।

इसका उद्देश्य रेलवे के सबसे व्यस्त मार्गों पर ट्रेनों की क्षमता बढ़ाना और माल एवं यात्री परिवहन को अधिक सुचारु बनाना है।

छत्तीसगढ़ और बिलासपुर-कटनी सेक्शन पर खास जोर

रेलवे विस्तार में छत्तीसगढ़ को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। सरकार के मुताबिक, राज्य के कई हिस्सों में पिछले कई दशकों से रेल नेटवर्क की क्षमता में अपेक्षित विस्तार नहीं हुआ था।

बिलासपुर से पेंड्रा और आगे कटनी की दिशा में रेल सेक्शन को मजबूत करने की योजना है। कुछ हिस्सों में पहले से तीन लाइनें मौजूद हैं, जबकि अन्य हिस्सों में दोहरी लाइन है। ऐसे में पूरे बिलासपुर-कटनी सेक्शन को चरणबद्ध तरीके से चार लाइन क्षमता वाला बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

यह इलाका देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक गतिविधियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

5 राज्यों के 14 जिलों में बढ़ेगा रेल नेटवर्क

केंद्र सरकार के मुताबिक, इन परियोजनाओं से पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों में रेलवे नेटवर्क का विस्तार होगा।

सरकार के अनुसार, इन प्रोजेक्ट्स के जरिए लगभग 656 किलोमीटर रेल नेटवर्क बढ़ेगा। इसका लाभ करीब 4,790 गांवों के 56 लाख लोगों को मिलने की उम्मीद है।

बेहतर रेल कनेक्टिविटी से इन क्षेत्रों में यात्रा के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है।

धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच होगी आसान

रेल नेटवर्क के विस्तार से कई प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है।

सरकार के मुताबिक, परियोजनाओं का फायदा तारातारिणी मंदिर, झारसुगुड़ा जगन्नाथ मंदिर, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, विराटेश्वर मंदिर, अमरकंटक, ज्वालेश्वर धाम, अचनकमार टाइगर रिजर्व, खुटाघाट बांध और रतनपुर महामाया मंदिर जैसे स्थानों की यात्रा में भी मिल सकता है।

रेलवे आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि रेलवे से जुड़े इन प्रोजेक्ट्स पर पिछले कई वर्षों से काम किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य हाई-डेंसिटी रेल कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ उन मार्गों को भी मजबूत करना है, जहां भविष्य में यातायात बढ़ने की संभावना है।

हाई-डेंसिटी नेटवर्क के विस्तार से यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों के संचालन की क्षमता बढ़ाने, भीड़ कम करने और देश के महत्वपूर्ण आर्थिक क्षेत्रों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी विकसित करने में मदद मिल सकती है।