काठमांडू में हिंसा के बाद गिरी ओली सरकार, सेना प्रमुख अशोक राज सिग्देल ने संभाली कमान

काठमांडू। नेपाल में दो दिनों तक चले हिंसक विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक उथल-पुथल के बीच आखिरकार प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली की सरकार गिर गई। हालात बिगड़ने के बाद सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिग्देल ने बुधवार को मोर्चा संभालते हुए सड़कों पर सैनिकों की तैनाती कर शांति बहाल की। इस बीच, नेपाल के युवाओं द्वारा चलाए जा रहे Gen-Z आंदोलन ने भी बुधवार को अपना प्रदर्शन अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया।

सेना और प्रदर्शनकारियों की बैठक

गुरुवार सुबह Gen-Z आंदोलन के करीब 15 प्रतिनिधियों ने भद्रकाली बेस पर सेना अधिकारियों से मुलाकात की। इस बैठक में प्रदर्शनकारियों ने अंतरिम नागरिक नेतृत्व के लिए कुछ नाम प्रस्तावित किए। इन नामों में पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की, काठमांडू के मेयर बलेंद्र शाह, पूर्व स्पीकर ओन्सारी घर्ती मगर, वकील ओम प्रकाश आर्याल, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. गोविंद केसी, ब्रिगेडियर जनरल प्रेम शाही और पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त नीलकंठ उप्रेती शामिल थे।

बैठक में विवाद

हालांकि बातचीत उस समय रुक गई जब प्रतिनिधि रक्षा बम बैठक छोड़कर चले गए। उनका कहना था कि सेना ने व्यवसायी दुर्गा प्रसाई और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को चर्चा में शामिल करने का सुझाव दिया। बम ने आरोप लगाया कि यह कदम आंदोलन की सत्यनिष्ठा को कमजोर करेगा।

रक्षा बम ने पत्रकारों से कहा, “सेना प्रमुख ने इन दोनों को हितधारक माना, जबकि यह Gen-Z आंदोलन के बलिदानों को कमतर आंकता है। इसलिए हमने इस प्रस्ताव को खारिज किया और बैठक छोड़ दी।”

सहमति सुशीला कार्की के नाम पर

विभिन्न मतभेदों के बीच आखिरकार सहमति पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की के नाम पर बनी। हालांकि उन्हें मनाना आसान नहीं था। सेना प्रमुख अशोक राज सिग्देल देर रात 2 बजे धापसी स्थित उनके घर पहुंचे और उनसे अनुरोध किया कि वे अंतरिम सरकार का नेतृत्व करें।

जनरल सिग्देल ने उन्हें इस कठिन समय में सबसे उपयुक्त नेता बताया। लगभग 15 घंटे बाद, जब Gen-Z आंदोलन के नेताओं ने औपचारिक रूप से उनसे आग्रह किया, तब जाकर सुशीला कार्की अंतरिम नेतृत्व के लिए तैयार हुईं।

मेयर बलेंद्र शाह का समर्थन

काठमांडू के मेयर बलेंद्र शाह, जिनका नाम भी अंतरिम सरकार के प्रमुख पद के लिए सुझाया गया था, उन्होंने स्वयं सुशीला कार्की के नाम का समर्थन किया। शाह ने कहा कि वर्तमान संकट की घड़ी में एक निष्पक्ष और सशक्त नेतृत्व की आवश्यकता है और कार्की इसके लिए सबसे उपयुक्त चेहरा हैं।

निष्कर्ष

नेपाल की मौजूदा राजनीतिक स्थिति यह संकेत देती है कि देश बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। प्रधानमंत्री ओली के इस्तीफे के बाद सेना की भूमिका बढ़ गई है और अंतरिम सरकार के गठन का रास्ता खुला है। पूर्व जस्टिस सुशीला कार्की का नेतृत्व देश में स्थिरता और लोकतांत्रिक व्यवस्था की बहाली की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है।