जानिये, बड़ी सैलरी पैकेज के बावजूद भी डॉक्टर क्यों नहीं चाहते ग्रामीण इलाकों में पोस्टिंग

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नई दिल्ली : जैसा की आप जानते हैं कि भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थय सुविधाओं की बदहाली तो हमेशा से ही चर्चा का विषय बनी रही है। आपको बता दें कि ग्राणीण इलाकों के स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञों की कमी के चलते राज्य सरकारों ने पेडियट्रिशियन, सर्जन और स्त्री रोग विशेषज्ञों की पोस्ट के लिए अधिक सैलरी की मंजूरी दी है। झारखंड और त्रिपुरा जैसे राज्यों में ये विशेषज्ञ 3-3.5 लाख रुपये तक प्रति माह कमा सकते हैं। लेकिन बावजूद इसके डॉक्टर ग्रामीण इलाकों में अपनी पोस्टिंग नहीं चाहते।

बता दें कि झारखंड उन पांच राज्यों में से एक है जहां एक योजना के तहत डॉक्टर खुद अपनी सैलरी उद्धरण कर सकते हैं। इसके अलावा ये अन्य चार राज्य मधय प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक हैं। झारखंड में जहां 3.5 लाख रुपये प्रति माहतक कमाए जा सकते हैं। वहीं छत्तीसगढ़ में प्रति माह 2.47 लाख रुपये कमाए जा सकते हैं। इसके अलावा एमपी और कर्नाटक में विशेषज्ञता के आधार पर सैलरी दी जाती है। जिसमें 2 लाख रुपये तक देना बताया गया है। अंडमान और निकोबार में अधिकतम सैलरी 2.5 लाख रुपये और दादर और नागर हवेली में 2.25 लाख रुपये दिए जा रहे हैं। इससे पहले इन राज्यों में 40 हजार से एक लाख रुपये तक ही सैलरी दी जा रही थी।

 

विशेषज्ञों को उनकी योग्यता के अनुसार बिहार में 50 हजार से 1 लाख रुपये प्रति माह तक दिए जा रहे हैं। ओडिशा में 83 हजार से 93 हजार रुपये प्रति माह, हिमाचल प्रदेश में 40 हजार से 73,750 रुपये प्रति माह, आंध्रप्रदेश में 52,500 रुपये से 1,52,250 रुपये और गुजरात में 55,125 रुपये से 1,75000 रुपये प्रति माह दिए जा रहे हैं। त्रिपुरा में आंकड़ा सबसे अधिक है, यहां 75 हजार से 3.5 लाख रुपये प्रति माह दिए जा रहे हैं।

साल 2017 में रूरल हेल्थ स्पेशलिस्ट रिपोर्ट में भी कहा गया है कि कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर में विशेषज्ञों की संख्या काफी कम है। रिपोर्ट के अनुसार पेडियट्रिशियन, सर्जन और स्त्री रोग विशेषज्ञों के स्वीकृत 22,496 पदों में से 18,347 खाली थे। स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ये सैलरी नेशनल हेल्थ मिशन के अंतर्गत मंजूर की गई हैं। यही एक रास्ता है ग्रामीण इलाकों तक बेहतर स्वस्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का। इसी कारण डॉक्टरों को अधिक सैलरी दी जा रही है। कई राज्यों में तो डॉक्टरों से खुद पूछा जा रहा है कि वह कितनी सैलरी लेना चाहते हैं।

मेवात के सिविल सर्जन संत लाल वर्मा का कहना है कि डॉक्टरों को सैलरी अधिक मिल रही है लेकिन फिर भी वह ग्रामीण इलाकों में नहीं जाना चाहते। इसके पीछे कई वजह हैं, जैसे वहां कम सुविधाओं का होना, अच्छे स्कूलों की कमी, जीवन गुणवत्ता का बेहतर न होना। उन्होंने बताया कि अभी वह एक दंपत्ति को नियुक्त कर रहे हैं।

पति पेडियट्रिशियन है और पत्नी स्त्री रोग विशेषज्ञ। स्त्री रोग विशेषज्ञों को 2.5 लाख रुपये और पेडियट्रिशियन को 2 लाख रुपये तक दिए जा रहे हैं। अभी इस दंपत्ति से बात की जा रही है जिसमें इन्होंने मांग की है कि पेडियट्रिशियन को भी 2.5 लाख रुपये दिए जाएं और रहने की व्यवस्था भी की जाए। इससे पहले इन्हें प्रति माह 80 हजार से 1 लाख रुपये तक ही मिल रहे थे।