“क्या हार्ट के मरीज हवाई जहाज से सफर कर सकते हैं? जानिए कार्डियोलॉजिस्ट की राय, एयर प्रेशर के प्रभाव, किन मरीजों को डॉक्टर की क्लीयरेंस की जरूरत है — पूरी जानकारी इस रिपोर्ट में।”
हवाई जहाज से यात्रा करना आज के समय में तेज़ और सुविधाजनक विकल्प बन चुका है। कुछ ही घंटों में लंबी दूरी तय की जा सकती है। लेकिन कई बार एयर प्रेशर और ऑक्सीजन लेवल में बदलाव के कारण लोगों को सांस लेने में परेशानी या कान में दर्द जैसी दिक्कत महसूस होती है। ऐसे में अक्सर सवाल उठता है — क्या हार्ट के मरीजों के लिए हवाई सफर सुरक्षित है या इससे कोई खतरा हो सकता है?
क्या होता है प्लेन में एयर प्रेशर और ऑक्सीजन लेवल का बदलाव?
प्लेन जब हजारों फीट की ऊंचाई पर उड़ता है, तो केबिन के अंदर प्रेशर और ऑक्सीजन लेवल सामान्य से थोड़ा कम हो जाता है। इसका असर ज्यादातर फेफड़ों पर पड़ता है। यही वजह है कि सांस के मरीजों को अधिक तकलीफ महसूस होती है।
हार्ट पर कितना असर पड़ता है?
नई दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल की सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. वनीता अरोरा के अनुसार:
एयर प्रेशर में बदलाव का हार्ट पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ता।
हेल्दी लोगों को एयर ट्रैवल के दौरान हार्ट से जुड़ी कोई दिक्कत नहीं होती।
यहां तक कि हार्ट के मरीज भी प्लेन में सफर कर सकते हैं, यह पूरी तरह सुरक्षित है।
कौन लोग डॉक्टर से क्लीयरेंस लेकर ही सफर करें?
डॉ. अरोरा बताती हैं कि जिन मरीजों को गंभीर हृदय रोग (Severe Heart Disease) है, उन्हें फ्लाइट लेने से पहले कार्डियोलॉजिस्ट से परामर्श जरूर लेना चाहिए।
जांच के बाद यदि डॉक्टर स्थिति को सुरक्षित मानते हैं, तो वे उन्हें एयर ट्रैवल क्लियरेंस दे देते हैं।
क्यों जरूरी है डॉक्टर से मिलना?
गंभीर हृदय रोग वाले मरीजों में उड़ान के दौरान:
सांस की समस्या
कमजोरी
चक्कर
अचानक ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव
जैसी स्थितियों की संभावना रहती है। इसलिए डॉक्टर की क्लियरेंस फ्लाइट को पूरी तरह से सुरक्षित बना देती है।
निष्कर्ष
हार्ट के सामान्य मरीज हवाई सफर कर सकते हैं — यह सुरक्षित है।
सीवियर हार्ट डिज़ीज़ वाले मरीज पहले कार्डियोलॉजिस्ट से सलाह लें।
एयर प्रेशर का सीधा खतरा हार्ट पर नहीं, बल्कि फेफड़ों पर ज्यादा होता है।

