लखनऊ स्टूडियो में गूंजे “माई रे माई” के स्वर
लखनऊ फिल्म स्टूडियो में आज हिंदी फिल्म फुर्रर का शुभारंभ एक भव्य संगीत रिकॉर्डिंग के साथ हुआ। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लोकगायक राकेश श्रीवास्तव ने अपनी सुमधुर आवाज़ में फिल्म के पहले गीत “माई रे माई” को रिकॉर्ड किया। इस गीत में मां और पिता की विवशताओं को मार्मिक ढंग से दर्शाया गया है, जो निश्चित ही दर्शकों के दिल को छू जाएगा।
राकेश श्रीवास्तव की कलम और आवाज़ का जादू
इस गीत को केवल गाया ही नहीं गया, बल्कि इसके बोल भी स्वयं राकेश श्रीवास्तव ने लिखे हैं। अपनी लेखनी और गायन, दोनों से उन्होंने गीत को जीवंत बना दिया।
- गीतकार और गायक: राकेश श्रीवास्तव
- संगीत निर्देशन: अशोक शिवपुरी
संगीतकार अशोक शिवपुरी के निर्देशन में तैयार इस गीत की धुन लोक और आधुनिक संगीत का बेहतरीन संगम प्रस्तुत करती है।
फिल्म फुर्रर की कहानी और कलाकार
इस फिल्म का निर्देशन शैलेश श्रीवास्तव कर रहे हैं। फिल्म का केंद्रीय किरदार निभा रहे हैं प्रसिद्ध अभिनेता ओमकार दास मानिकपुरी, जिन्हें दर्शक आमिर खान की फिल्म पीपली लाइव में “नत्था” के नाम से याद करते हैं।
ओमकार दास की सशक्त अभिनय क्षमता इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है। फिल्म फुर्रर समाज की गहरी संवेदनाओं और जमीनी हकीकतों को परदे पर उतारने का प्रयास है।
निर्माण और प्रस्तुति
फिल्म फुर्रर का निर्माण हिंदी फिल्म पलक फेम चित्रगुप्त आर्ट्स और ए. एस. इंटरप्राइजेज के बैनर तले हो रहा है।
- निर्माता: मधुप श्रीवास्तव
- निर्देशक: शैलेश श्रीवास्तव
- मुख्य कलाकार: ओमकार दास मानिकपुरी
फिल्म की यूनिट का कहना है कि यह फिल्म दर्शकों को न केवल मनोरंजन देगी बल्कि सामाजिक सोच को झकझोरने का भी काम करेगी।
मुहूर्त पर विशेष माहौल
फिल्म के पहले गाने की रिकॉर्डिंग के साथ ही फिल्म का मुहूर्त संपन्न हुआ।
- रिकॉर्डिंग स्टूडियो में मौजूद सभी कलाकारों और तकनीशियनों ने इसे यादगार पल बताया।
- मौके पर उपस्थित फिल्म से जुड़े लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट से राकेश श्रीवास्तव और संगीतकार अशोक शिवपुरी का उत्साह बढ़ाया।
फिल्म से जुड़ी उम्मीदें
- फिल्म फुर्रर से जुड़े विशेषज्ञों और कलाकारों का मानना है कि –
- लोकगीत और आधुनिक संगीत का संगम दर्शकों को आकर्षित करेगा।
- कहानी की संवेदनशीलता और ओमकार दास मानिकपुरी का अभिनय फिल्म को खास बनाएगा।
- यह फिल्म उन असहाय माता-पिता की मार्मिक कहानी है, जो अपनी औलादों को पढ़ा-लिखाकर बड़ा करते हैं, लेकिन बुढ़ापे में वही संतान उन्हें अकेला छोड़ देती है। कभी संपत्ति के लिए उनका कत्ल होता है, तो कभी वृद्धाश्रम में डाल दिया जाता है। फुर्रर इन्हीं सामाजिक सच्चाइयों को बड़े परदे पर जीवंत करने का प्रयास है।
निष्कर्ष
फिल्म फुर्रर का मुहूर्त गीत “माई रे माई” न केवल एक संगीतमय शुरुआत है, बल्कि समाज की गहरी भावनाओं की झलक भी है। राकेश श्रीवास्तव की लेखनी और आवाज़, अशोक शिवपुरी का संगीत निर्देशन और शैलेश श्रीवास्तव का निर्देशन इस फिल्म को खास बनाने की ओर संकेत कर रहा है।
अब देखना यह है कि जब फुर्रर बड़े परदे पर आएगी तो क्या यह दर्शकों के दिल में अपनी गहरी छाप छोड़ पाएगी।


