सिर्फ 6 साल का बच्चा, स्कूल-ट्यूशन में बीत जाते हैं 12 घंटे! वायरल हुआ पोस्ट, लोगों ने दी सलाह

एक 6 साल के बच्चे के टाइट शेड्यूल की कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। लोग बच्चे पर पड़ रहे प्रेशर को लेकर चिंता जता रहे हैं और पेरेंट्स को सलाह दे रहे हैं।

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक पिता ने अपने 6 साल के बच्चे का बेहद टाइट रूटीन साझा किया है। क्लास 1 में पढ़ने वाले इस बच्चे की दिनचर्या देखकर कई लोग हैरान हैं और इसे छोटे बच्चे पर दबाव बताकर आलोचना कर रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि इतनी कम उम्र में ऐसा शेड्यूल उसके मानसिक और शारीरिक विकास को नुकसान पहुंचा सकता है।

सुबह 7 बजे शुरू होता है दिन, रात 10 बजे होती है नींद

पोस्ट के अनुसार, बच्चे की दिनचर्या कुछ इस तरह है:

सुबह 7 बजे उठना

  • 8 बजे तक स्कूल के लिए निकलना
  • 9 बजे से 3:15 बजे तक स्कूल
  • 4 बजे घर पहुंचना (5 किमी दूरी के कारण समय अधिक लगना)
  • 4 से 5 बजे तक थोड़ा रेस्ट और स्नैक्स
  • 5 बजे से 6:30 बजे तक ट्यूशन
  • इसके बाद डिनर, होमवर्क
  • रात 10 बजे तक सोना

कुल मिलाकर, बच्चा लगभग 12 घंटे पढ़ाई और स्कूल-ट्यूशन में व्यतीत कर रहा है, जबकि फिजिकल एक्टिविटी का समय लगभग शून्य है।

पिता को लगा शेड्यूल ज़्यादा भारी, लिया ट्यूशन छुड़ाने का फैसला

बच्चे के पिता ने लिखा कि उन्हें अपने बच्चे पर इतना बोझ अच्छा नहीं लग रहा, इसलिए उन्होंने उसकी कोचिंग बंद करवाने का निर्णय लिया है। साथ ही उन्होंने लोगों से पूछा कि क्या यह फैसला सही है?

सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं

इस पोस्ट ने लाखों लोगों का ध्यान खींचा। अब तक 1.56 लाख से अधिक व्यूज़ और 1000 से ज्यादा कमेंट्स आ चुके हैं। अधिकांश यूजर्स इस रूटीन को गलत बताते हुए बच्चे को खुलकर खेलने का समय देने की सलाह दे रहे हैं।

लोगों की प्रमुख सलाह:

  • छोटे बच्चे को कोचिंग की जरूरत नहीं।
  • आउटडोर/फिजिकल एक्टिविटी और गेम्स ज्यादा जरूरी।
  • कम उम्र में ज्यादा प्रेशर दिमागी विकास के लिए नुकसानदायक।
  • बच्चे को क्रिएटिव और माइंड-मैपिंग गतिविधियों में शामिल किया जाए।

कई लोगों ने लिखा कि “क्लास 1 के बच्चे के लिए यह शेड्यूल बिल्कुल भी हेल्दी नहीं है। खेलने-दौड़ने का समय उनकी ग्रोथ के लिए सबसे ज़रूरी होता है।”

मॉडर्न पैरेंटिंग पर उठे सवाल

यह घटना आधुनिक शिक्षा प्रणाली और पैरेंटिंग के बीच तनावपूर्ण संतुलन को भी उजागर करती है। जहां कुछ स्कूल बच्चे को बिना ट्यूशन के सक्षम बनाते हैं, वहीं कई जगह का बोझ पेरेंट्स को ट्यूशन का सहारा लेने पर मजबूर करता है।