Passport Debate News: क्या पासपोर्ट भारतीय नागरिकता का प्रमाण है? विदेश मंत्रालय के बयान के बाद छिड़ी बहस के बीच जानिए भारतीय कानून क्या कहता है। नागरिकता साबित करने वाला असली दस्तावेज कौन सा है और पासपोर्ट, आधार, वोटर ID की कानूनी स्थिति क्या है।
नई दिल्ली: पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा दिए गए बयान ने नागरिकता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अधिकारी ने कहा कि भारतीय पासपोर्ट एक यात्रा दस्तावेज है, नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं। इसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए कि यदि पासपोर्ट, आधार कार्ड और वोटर आईडी भी नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं हैं, तो आखिर भारतीय नागरिकता साबित करने वाला असली दस्तावेज कौन सा है?
हालांकि कानूनी दृष्टि से यह कोई नई बात नहीं है। भारतीय कानून वर्षों से पासपोर्ट और नागरिकता को दो अलग-अलग अवधारणाओं के रूप में देखता रहा है।
पासपोर्ट क्या वास्तव में नागरिकता का प्रमाण है?
सामान्य धारणा यह है कि भारतीय पासपोर्ट केवल भारतीय नागरिकों को ही जारी किया जाता है, इसलिए इसे नागरिकता का प्रमाण माना जाता है। लेकिन कानूनी रूप से स्थिति इससे थोड़ी अलग है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पासपोर्ट किसी व्यक्ति की पहचान और अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला दस्तावेज है। यह नागरिकता से जुड़ी जानकारी तो दर्शाता है, लेकिन इसे नागरिकता का अंतिम और निर्णायक कानूनी प्रमाण नहीं माना जाता।
पासपोर्ट एक्ट 1967 की धारा 20 क्या कहती है?
पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 20 के अनुसार केंद्र सरकार विशेष परिस्थितियों में किसी गैर-भारतीय नागरिक को भी पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज जारी कर सकती है, यदि ऐसा करना जनहित में आवश्यक समझा जाए।
यानी कानून स्वयं यह स्वीकार करता है कि पासपोर्ट और नागरिकता हमेशा एक ही चीज नहीं हैं। यही कारण है कि पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम कानूनी प्रमाण नहीं माना जाता।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी स्पष्ट की थी स्थिति
वर्ष 2013 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा था कि किसी व्यक्ति के पास पासपोर्ट होना यह साबित नहीं करता कि वह निश्चित रूप से भारतीय नागरिक है।
अदालत ने स्पष्ट किया था कि पासपोर्ट को नागरिकता के अंतिम प्रमाण के रूप में नहीं देखा जा सकता और नागरिकता का निर्धारण संबंधित कानूनी प्रावधानों के आधार पर किया जाएगा।
भारतीय नागरिकता कैसे प्राप्त होती है?
भारत में नागरिकता प्राप्त करने की प्रक्रिया नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत निर्धारित की गई है। कानून के अनुसार भारतीय नागरिकता मुख्य रूप से पांच तरीकों से प्राप्त की जा सकती है।
1. जन्म के आधार पर नागरिकता
26 जनवरी 1950 से 1 जुलाई 1987 के बीच भारत में जन्म लेने वाला प्रत्येक व्यक्ति भारतीय नागरिक माना गया।
1 जुलाई 1987 से 3 दिसंबर 2004 के बीच जन्मे व्यक्ति के लिए माता या पिता में से किसी एक का भारतीय नागरिक होना आवश्यक था।
3 दिसंबर 2004 के बाद जन्मे बच्चों के लिए कम से कम एक अभिभावक का भारतीय नागरिक होना और दूसरा अवैध प्रवासी न होना जरूरी है।
2. वंश (Descent) के आधार पर नागरिकता
विदेश में जन्मे बच्चों को भारतीय माता-पिता के आधार पर नागरिकता मिल सकती है, बशर्ते निर्धारित समय सीमा के भीतर भारतीय दूतावास में उनका पंजीकरण कराया गया हो।
3. पंजीकरण (Registration) के माध्यम से
भारतीय मूल के कुछ व्यक्तियों या विशेष श्रेणियों के लोगों को आवेदन के आधार पर नागरिकता प्रदान की जा सकती है।
4. प्राकृतिककरण (Naturalization) के माध्यम से
कोई विदेशी नागरिक जो कानून के अनुसार भारत में निर्धारित अवधि तक निवास करता है, वह प्राकृतिककरण के जरिए भारतीय नागरिकता प्राप्त कर सकता है।
5. क्षेत्र के विलय के आधार पर
यदि कोई नया क्षेत्र भारत में शामिल होता है, तो केंद्र सरकार आदेश जारी कर वहां के निवासियों को भारतीय नागरिकता प्रदान कर सकती है।
नागरिकता का वास्तविक और कानूनी प्रमाण क्या है?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय नागरिकता का सबसे औपचारिक और वैध प्रमाण Citizenship Certificate (नागरिकता प्रमाण पत्र) होता है, जिसे नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत जारी किया जाता है।
यह प्रमाण पत्र विशेष रूप से उन मामलों में महत्वपूर्ण होता है जहां नागरिकता को लेकर कानूनी या प्रशासनिक विवाद उत्पन्न होता है।
आधार, वोटर ID और PAN कार्ड की क्या भूमिका है?
आधार कार्ड, वोटर आईडी, पैन कार्ड और पासपोर्ट जैसे दस्तावेज पहचान, निवास, कराधान या मतदान संबंधी उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जाते हैं।
हालांकि ये दस्तावेज किसी व्यक्ति की पहचान स्थापित करने में मदद करते हैं, लेकिन भारतीय नागरिकता का अंतिम कानूनी प्रमाण नहीं माने जाते।
क्यों महत्वपूर्ण है यह बहस?
हाल के वर्षों में नागरिकता, पहचान और दस्तावेजों को लेकर देशभर में कई चर्चाएं और कानूनी बहसें हुई हैं। ऐसे में विदेश मंत्रालय के अधिकारी के बयान ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि नागरिकता और पहचान संबंधी दस्तावेजों के बीच अंतर को समझना जरूरी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नागरिकता का निर्धारण हमेशा संबंधित कानूनों और सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर किया जाता है, न कि केवल किसी एक पहचान पत्र के आधार पर।

