होर्मुज संकट का असर: $178 बिलियन ट्रेड पर खतरा, गैस और दवाइयों की कीमत बढ़ने की आशंका?

होर्मुज संकट से भारत के $178 बिलियन व्यापार पर खतरा। जानें गैस, दवाइयों और तेल की कीमतों पर क्या होगा असर और सरकार ने क्या कदम उठाए।

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और Strait of Hormuz में बाधा के चलते भारत के करीब $178 बिलियन के व्यापार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। सरकार की ताज़ा इंटर-मिनिस्ट्रियल ब्रीफिंग में बताया गया कि यह संकट केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं है, बल्कि कई अहम सेक्टर पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

ऊर्जा सप्लाई पर सबसे बड़ा खतरा

भारत की लगभग 45% कच्चे तेल (Crude Oil) और 90% एलपीजी (LPG) सप्लाई Strait of Hormuz के जरिए होती है। ऐसे में इस मार्ग में रुकावट से ऊर्जा संकट गहराने की आशंका है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश के पास लगभग 60 दिनों का पर्याप्त तेल भंडार मौजूद है और फिलहाल पेट्रोल-डीजल व गैस की सप्लाई सामान्य है।

किन सेक्टर्स पर पड़ेगा असर?

सरकारी विश्लेषण के अनुसार, जेम्स एंड ज्वेलरी, फार्मा, इंजीनियरिंग और एग्रीकल्चर सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।

  • जेम्स एंड ज्वेलरी: दुबई जैसे ट्रेड हब पर निर्भरता के कारण निर्यात पर असर
  • फार्मा सेक्टर: जरूरी केमिकल्स और API सप्लाई में बाधा की आशंका
  • एग्रो प्रोडक्ट्स: चावल, मसाले जैसे निर्यात महंगे और धीमे हो सकते हैं
  • इंजीनियरिंग गुड्स: नए ऑर्डर और कॉन्ट्रैक्ट्स प्रभावित हो सकते हैं

बढ़ सकती हैं कीमतें?

तेल की कीमतों में उछाल से पेट्रोकेमिकल्स महंगे हो सकते हैं, जिसका असर दवाइयों, प्लास्टिक और अन्य मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर पड़ सकता है। इससे आम लोगों के लिए गैस, दवाइयां और रोजमर्रा की चीजें महंगी होने की आशंका बढ़ जाती है।

सरकार ने क्या कदम उठाए?

स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने 2 मार्च 2026 को इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप (IMG) का गठन किया है, जो रोजाना हालात की समीक्षा कर रहा है।

  • वेस्ट एशिया क्राइसिस डेस्क और टोल-फ्री हेल्पलाइन (1800-111-550) शुरू
  • एक्सपोर्टर्स के लिए समयसीमा बढ़ाकर 31 अगस्त 2026 की गई
  • ECGC कवर 100% तक बढ़ाया गया
  • फार्मा सप्लाई के लिए API और सॉल्वेंट्स पर निगरानी

आम जनता के लिए राहत

सरकार ने साफ किया है कि देश में फिलहाल ईंधन या गैस की कोई कमी नहीं है। रिटेल आउटलेट्स सामान्य रूप से काम कर रहे हैं और एलपीजी सप्लाई भी स्थिर बनी हुई है।

पश्चिम एशिया का यह संकट भारत के लिए एक बड़ा आर्थिक और रणनीतिक चुनौती बन सकता है, लेकिन सरकार की सक्रिय निगरानी और तैयारियों से फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। आने वाले समय में वैश्विक हालात के आधार पर कीमतों और सप्लाई पर असर देखने को मिल सकता है।