उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए चरित्र सत्यापन के नए नियम लागू। हिंसक गतिविधियों और गंभीर अपराधों पर होगी सख्त जांच, पुलिस 30 दिन में रिपोर्ट देगी।
UP Government Job Rules 2026: उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए बड़ा अपडेट सामने आया है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने सीधी भर्ती में चरित्र सत्यापन (Character Verification) के नियमों को और सख्त कर दिया है। नए निर्देशों के मुताबिक, हिंसक गतिविधियों, गंभीर अपराधों और व्यवस्था को हिंसा के जरिए बदलने वाली गतिविधियों में शामिल पाए जाने वाले अभ्यर्थियों के मामलों की विशेष जांच होगी। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि केवल राजनीतिक विचारधारा, शांतिपूर्ण राजनीतिक गतिविधियों या सिर्फ एफआईआर दर्ज होने के आधार पर किसी अभ्यर्थी को स्वतः अयोग्य नहीं माना जाएगा।
नियुक्ति विभाग के प्रमुख सचिव एम. देवराज द्वारा जारी निर्देशों में पुलिस को चरित्र सत्यापन रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर देने का निर्देश भी दिया गया है, ताकि भर्ती प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।
चरित्र सत्यापन के नियम क्यों हुए सख्त?
राज्य सरकार का कहना है कि सरकारी सेवाओं में नियुक्ति से पहले अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड की स्पष्ट और व्यवस्थित जांच सुनिश्चित करना इस व्यवस्था का उद्देश्य है।
नए दिशा-निर्देशों के तहत पुलिस अभ्यर्थियों के आपराधिक रिकॉर्ड, गंभीर मामलों में संलिप्तता और हिंसक गतिविधियों से जुड़े तथ्यों की जांच करेगी। इसके आधार पर संबंधित विभाग नियुक्ति पर अंतिम निर्णय लेंगे।
किन मामलों में होगी विशेष जांच?
नए नियमों के अनुसार निम्न मामलों में विशेष रूप से चरित्र सत्यापन पर ध्यान दिया जाएगा:
- हिंसा के जरिए व्यवस्था बदलने वाली गतिविधियों में भागीदारी
- हत्या और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर अपराध
- डकैती और लूट
- दुष्कर्म और महिलाओं की गरिमा भंग से जुड़े अपराध
- भ्रष्टाचार के गंभीर मामले
- आतंकवादी गतिविधियों से संबंध
- पेपर लीक और सॉल्वर गैंग से जुड़ी गतिविधियां
- ऐसे संगठनों से जुड़ाव जिनका उद्देश्य हिंसक तरीके से व्यवस्था बदलना हो
सरकार का कहना है कि ऐसे मामलों में उपलब्ध रिकॉर्ड और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
क्या प्रदर्शन करने पर सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी?
सरकार के निर्देशों में एक महत्वपूर्ण स्पष्टता भी दी गई है।
- केवल किसी राजनीतिक विचारधारा से जुड़े होने पर अभ्यर्थी अयोग्य नहीं होगा।
- शांतिपूर्ण राजनीतिक गतिविधियों में भागीदारी अपने आप नौकरी से वंचित करने का आधार नहीं बनेगी।
- सिर्फ एफआईआर दर्ज होना या जांच लंबित होना भी स्वतः अयोग्यता का कारण नहीं माना जाएगा।
अंतिम फैसला चरित्र सत्यापन के दौरान सामने आए तथ्यों और लागू नियमों के आधार पर लिया जाएगा।
21 साल की उम्र के बाद की गतिविधियों पर भी होगी नजर
नए प्रावधानों के तहत 21 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद की गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
जानकारी के अनुसार, जांच की तारीख से पिछले तीन वर्षों के भीतर यदि कोई व्यक्ति हिंसक तरीके से व्यवस्था बदलने वाली गतिविधियों में सक्रिय पाया जाता है, तो इसे उसके वर्तमान आचरण के मूल्यांकन में महत्वपूर्ण माना जाएगा।
पुलिस को 30 दिन में देनी होगी रिपोर्ट
सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को तेज बनाने के लिए पुलिस को समयसीमा भी तय कर दी है।
- चरित्र सत्यापन रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर भेजनी होगी।
- इससे भर्ती प्रक्रिया में होने वाली देरी कम होने की उम्मीद है।
- संबंधित विभाग पुलिस रिपोर्ट और अभ्यर्थी के रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कार्रवाई करेंगे।
किन विभागों पर लागू होंगे नए नियम?
ये दिशा-निर्देश उत्तर प्रदेश सरकार के तहत होने वाली सीधी भर्ती पर लागू होंगे, जिनमें शामिल हैं:
- राज्य सरकार के विभाग
- सरकारी निगम
- परिषदें
- स्थानीय निकाय
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों का दोबारा चरित्र सत्यापन नहीं कराया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर उनके पूर्व विभाग से संबंधित जानकारी ली जा सकती है।
युवाओं के लिए क्या है संदेश?
सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए सबसे अहम बात यह है कि केवल राजनीतिक विचार रखना या शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक गतिविधियों में भाग लेना नौकरी से वंचित होने का आधार नहीं है। लेकिन हिंसक गतिविधियों, गंभीर आपराधिक मामलों और निर्धारित नियमों के तहत आने वाले मामलों की जांच पहले से अधिक सख्ती से की जाएगी।

