TMC Crisis: ED पूछताछ के बीच अभिषेक बनर्जी को लोकसभा स्पीकर का 2 घंटे में पेश होने का नोटिस। 20 बागी सांसदों के विलय विवाद पर बढ़ी सियासी हलचल, जानिए पूरा मामला।
कोलकाता/नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी राजनीतिक संकट के बीच पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। एक तरफ जहां प्रवर्तन निदेशालय (ED) उनसे पूछताछ कर रहा था, वहीं दूसरी ओर लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय की ओर से उन्हें मात्र दो घंटे के भीतर पेश होने का नोटिस भेजा गया। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब TMC के 20 बागी सांसदों द्वारा दूसरे राजनीतिक दल में विलय की मांग ने पार्टी के अंदरूनी संकट को और गहरा कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
सूत्रों के अनुसार, 15 जून को दोपहर करीब 2 बजे लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय ने अभिषेक बनर्जी को ईमेल के माध्यम से शाम 4 बजे उपस्थित होने का नोटिस भेजा था। उसी समय अभिषेक बनर्जी प्रवर्तन निदेशालय (ED) की पूछताछ में शामिल थे। जांच प्रक्रिया के दौरान उनके पास मोबाइल फोन या निजी ईमेल देखने की सुविधा नहीं थी, जिसके कारण वे समय पर नोटिस नहीं देख पाए।
बताया जा रहा है कि ईमेल भेजे जाने के लगभग एक घंटे बाद स्पीकर कार्यालय ने TMC सांसद कीर्ति आजाद से फोन पर संपर्क कर बैठक की जानकारी दी। इसके बाद कीर्ति आजाद स्वयं स्पीकर कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों को सूचित किया कि अभिषेक बनर्जी ED की पूछताछ में व्यस्त हैं तथा निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं हो सकते।
कीर्ति आजाद ने मांगा नया समय
कीर्ति आजाद ने लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय से नई तारीख और समय निर्धारित करने का अनुरोध किया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभिषेक बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस इस पूरी प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए तैयार हैं और किसी भी संवैधानिक प्रक्रिया से बचने का प्रयास नहीं कर रहे हैं।
20 बागी सांसदों के विलय अनुरोध पर बढ़ी चर्चा
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में TMC के 20 बागी सांसदों का मामला है। इन सांसदों ने हाल ही में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर अपने गुट के दूसरे राजनीतिक दल में विलय को मान्यता देने की मांग की है।
बागी सांसदों का दावा है कि उनका विलय संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप है, जबकि तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व इसे पार्टी विरोधी गतिविधि मानते हुए चुनौती दे रहा है। यही वजह है कि यह मामला अब केवल राजनीतिक नहीं बल्कि कानूनी और संसदीय दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण बन गया है।
जल्दबाजी में फैसला नहीं करेंगे स्पीकर
सूत्रों के मुताबिक लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इस मामले में कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहते। वे पहले दोनों पक्षों की दलीलें सुनेंगे, संबंधित दस्तावेजों की जांच करेंगे और उसके बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
संसदीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बागी सांसदों का विलय अनुरोध स्वीकार होता है तो इसका तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति पर बड़ा असर पड़ सकता है। वहीं यदि इसे खारिज किया जाता है तो बागी सांसदों के खिलाफ दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।
TMC के लिए बढ़ती चुनौती
पश्चिम बंगाल की राजनीति में पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रही तृणमूल कांग्रेस के लिए यह विवाद नई मुश्किलें खड़ी कर सकता है। पार्टी नेतृत्व एक ओर बागी सांसदों को रोकने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई और संसदीय प्रक्रियाओं का दबाव भी बढ़ता जा रहा है।
फिलहाल सभी की नजर लोकसभा अध्यक्ष के अगले कदम पर टिकी हुई है, क्योंकि उनका फैसला न केवल बागी सांसदों के राजनीतिक भविष्य बल्कि तृणमूल कांग्रेस की आंतरिक स्थिति पर भी गहरा प्रभाव डाल सकता है।

