भारत जैसे देश में जहाँ धर्मान्धता अपनी चरम सीमा पर व्याप्त है। वहाँ पर चाहे भी तो दलगत राजनीति से ऊपर नहीं उठाया जा सकता है। वस्तुतः जाति और धर्म यदि किसी देश की रीढ़ है, तो उनसे उपजे खतरे ही उस देश को खोखला बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका...

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“ नवरात्रि “ एक ऐसा शब्द, जिसका अर्थ साधारणतया भाषा में ज्यादातर लोग समझते है कि नवरात्रि में लोगों के दवारा शक्ति की उपासना के इस पर्व में माँ दुर्गा की उपासना की जाती है और काफ़ी श्रद्धालु नौ दिनों तक व्रत-उपवास रखते हैं और नियम-संयम से रहते हैं।...

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dharm

भारत जैसे देश में जहाँ धर्मान्धता अपनी चरम सीमा पर व्याप्त है। वहाँ पर चाहे भी तो दलगत राजनीति से ऊपर नहीं उठाया जा सकता है। वस्तुतः जाति और धर्म यदि किसी देश की रीढ़ है, तो उनसे उपजे खतरे ही उस देश को खोखला बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका...

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makar

लोहड़ी से अगले दिन ही मकर संक्रांति का पर्व होता है, जो अपने अनेक पर्यायवाची नामों से समूचे उत्तर-भारत में बड़ी निष्ठा के साथ मनाया जाता है। अब से लगभग अस्सी वर्श पहले 12 जनवरी को लोहड़ी तथा उससे अगले दिन मकर-संक्रांति मनाई गई थी पर, अब सूर्य परिक्रमा...

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amarnath-yaatra

केदारनाथ धाम के त्रासदी के बाद अमरनाथ यात्रा पर गये श्रधालुओ को बर्फानी बाबा के दर्शन न होने और समय से पहले अंतर्धान हो जाने से भक्तों में तरह तरह कि आशंकाएं उत्पन्न हो गए हैं। भक्तगण यह नहीं समझ पा रहे कि बाबा क्यो रूठे हैं। यात्रा शुरू...

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ramadan

जन्नत के दरवाजे रमजान दिनों से खुल गये और तमाम शयातीन कैद कर दिये गये। रमजान का पाक महीना शुरू हो गया और अल्लाह के नेक बंदों पर इनाम व इकराम की बारिश का नजूल शुरू हो गया। कुरान के मुताबिक इस माह में अल्लाह तल्ला दिन व रात...

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akshaya-tritiya

पुराणों के अनुसार अक्षय तृतीया पर्व के संबंध में श्रीकृष्ण ने कहा है कि यह तिथि परम पुण्यमय है। इस दिन दोपहर से पूर्व स्नान, जप, तप, होम, स्वाध्याय, पितृ.तर्पण तथा दान आदि करने वाला महाभाग अक्षय पुण्यफल का भागी होता है। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया...

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Godess-parvati-tungareshwar

देवाधिदेव महादेव का सबसे ज्यादा प्रिय पार्वती जी के मंदिरों की संख्या देश भर में नहीं के बराबर है, मगर इन्दौर में केशरबाग रोड पर एक अत्यंत प्राचीन मंदिर है। इसका नाम केशरबाग शिव मंदिर उत्कीर्ण है, परन्तु इस स्थान का वास्तविक नाम पार्वती तुकेश्वर महादेव मंदिर है। इस...

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Karneshwar-temple

मलवांचल में कौरवों ने अनेक मंदिर बनाएं थे जिसमें से एक है सेंधल नदी के किनारे बसा यह कर्णेश्वर महादेव का मंदिर। करनावाद (कर्णावत) नगर के राजा कर्ण यहां बैठकर ग्रामवासियों को दान दिया करते थे इस कारण इस मंदिर का नाम कर्णेश्वर मंदिर पड़ा। ऐसी मान्यता है कि...

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Jwala-Devi-Shakti-Peeth-Temple

वेदों ने भी माता जी की स्तुती करते हुए उनके उद्भव के बारे में लिखा है माया को प्रकृति और महेश्वर को ब्रह्मजानों और उन दोनों की इच्छा मात्र से उत्पन्न इस जगत को जानों, अर्थात् जो भी इस संसार में है वह इन दिनों के प्रभाव से है।...

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