अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने पूछा कि इतनी जल्दबाजी क्यों है और कहा कि 12 जुलाई के बाद मामले पर सुनवाई की जाएगी। जानिए पूरा मामला।
नई दिल्ली: अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और धन के दुरुपयोग से जुड़े मामले ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया है। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में तत्काल सुनवाई की मांग को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियमित कार्यवाही शुरू होने के बाद, यानी 12 जुलाई के बाद, इस याचिका पर सुनवाई की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से सवाल किया कि इस मामले में तत्काल सुनवाई की ऐसी क्या आवश्यकता है। अदालत ने कहा कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही मामले की सुनवाई की जाएगी।
तत्काल सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में दावा किया कि राम जन्मभूमि ट्रस्ट से जुड़े मामले में लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं और इस कारण जल्द सुनवाई जरूरी है। हालांकि, अदालत ने तत्काल सूचीबद्ध करने से इनकार करते हुए कहा कि न्यायालय खुलने के बाद नियमानुसार इस पर सुनवाई होगी।
कोर्ट के अनुसार, मामले की अगली सुनवाई अब 12 जुलाई के बाद होने की संभावना है।
याचिका में लगाए गए गंभीर आरोप
याचिका में राम जन्मभूमि ट्रस्ट पर चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है और इसमें देरी होने से न्याय प्रभावित हो सकता है।
हालांकि, अदालत ने इस चरण पर आरोपों की सत्यता या मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका जताई
याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष यह भी आशंका जताई कि यदि मामले की जल्द सुनवाई नहीं हुई तो कथित तौर पर सबूतों के साथ छेड़छाड़ की संभावना बनी रह सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन के अब तक के रवैये से कई सवाल खड़े होते हैं, इसलिए न्यायिक हस्तक्षेप जल्द होना चाहिए।
कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पूछा कि मामले में इतनी जल्दबाजी की वजह क्या है। अदालत ने कहा कि वह नियमित कार्यवाही शुरू होने के बाद याचिका पर सुनवाई करेगी और फिलहाल तत्काल सुनवाई का कोई आधार नहीं बनता।
मामले पर बनी हुई है नजर
राम मंदिर चढ़ावा प्रबंधन को लेकर उठे विवाद ने राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा तेज कर दी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि 12 जुलाई के बाद सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर क्या रुख अपनाता है और आगे की सुनवाई में क्या निर्देश जारी करता है।

