पेपर लीक रोकने के लिए केंद्र सरकार नया संशोधन लाने की तैयारी में है। दोषियों को 10 साल तक की जेल, ₹1 करोड़ जुर्माना और फास्ट-ट्रैक कोर्ट का प्रावधान हो सकता है।
नई दिल्ली: देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं को लेकर बढ़ते विरोध और छात्रों की नाराजगी के बीच केंद्र सरकार कानून को और सख्त बनाने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार, सरकार ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024’ में संशोधन लाने पर विचार कर रही है, जिससे पेपर लीक जैसे अपराधों पर और कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
बताया जा रहा है कि प्रस्तावित संशोधनों को 24 जुलाई को होने वाली केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में रखा जा सकता है। यदि मंजूरी मिलती है तो आगामी संसद सत्र में संशोधन विधेयक पेश किया जा सकता है।
10 साल तक की जेल और ₹1 करोड़ तक जुर्माना
सूत्रों के मुताबिक, नए संशोधन के तहत पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ सजा और आर्थिक दंड दोनों को काफी बढ़ाया जा सकता है।
प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार—
- दोषियों को 5 से 10 वर्ष तक की कैद हो सकती है।
- अधिकतम ₹1 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
- मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट को अधिक अधिकार दिए जा सकते हैं।
हालांकि, इन प्रस्तावों पर सरकार की ओर से अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
PM मोदी ने भी दिए सख्त संकेत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में छात्रों के भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि पेपर लीक जैसे अपराध किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि:
“पेपर लीक से जुड़े मामलों की तेजी से सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए विभागों ने फास्ट-ट्रैक कोर्ट से जुड़ा प्रस्ताव तैयार कर लिया है। इस पर कैबिनेट में चर्चा होगी और जल्द ही संसद में आवश्यक विधायी कदम उठाए जाएंगे।”
प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को कड़ी सजा दिलाने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
मौजूदा कानून में क्या है प्रावधान?
वर्तमान सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत—
- 3 से 5 वर्ष तक की कैद
- ₹10 लाख तक जुर्माना
का प्रावधान है। अब सरकार इसे और अधिक प्रभावी और कठोर बनाने की दिशा में काम कर रही है।
प्रस्तावित नए संशोधन की प्रमुख बातें
- पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट को अतिरिक्त अधिकार।
- कैद की अवधि 3–5 वर्ष से बढ़ाकर 5–10 वर्ष तक करने का प्रस्ताव।
- जुर्माने की सीमा ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹1 करोड़ तक करने की तैयारी।
- संगठित परीक्षा माफिया और नेटवर्क के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई।
- छात्रों के आंदोलन के बीच सरकार की तैयारी
देशभर में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के विरोध में छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी बीच सरकार का यह प्रस्ताव परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वास बहाल करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
हालांकि, अंतिम फैसला कैबिनेट की मंजूरी और संसद में विधेयक पारित होने के बाद ही लागू होगा।

