ईरान युद्ध और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 92.43 पर पहुंच गया। विदेशी निवेश की निकासी और वैश्विक तनाव से मुद्रा पर दबाव बढ़ा।
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय मुद्रा पर दबाव बढ़ता जा रहा है। ईरान से जुड़े युद्ध के लंबा खिंचने की आशंकाओं के बीच भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर हो गया है। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन रुपया 13 पैसे गिरकर 92.43 प्रति डॉलर तक पहुंच गया, जो हाल के समय में सबसे कमजोर स्तरों में से एक है।
विदेशी मुद्रा बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, विदेशी निवेश की निकासी और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव भारतीय रुपये पर दबाव डाल रहे हैं।
क्यों कमजोर हो रहा है रुपया?
विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता के कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा है। इसका सीधा असर भारतीय मुद्रा पर पड़ा है।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 92.44 प्रति डॉलर पर खुला और दिन के कारोबार के दौरान 92.43 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। यह पिछले बंद भाव के मुकाबले 13 पैसे की गिरावट दर्शाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ती है तो निवेशक सुरक्षित माने जाने वाले डॉलर की ओर रुख करते हैं, जिससे अन्य मुद्राएं कमजोर होने लगती हैं।
कच्चे तेल की कीमतों का असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी रुपये की कमजोरी का बड़ा कारण बन रही है। वैश्विक मानक Brent Crude Oil की कीमत करीब 104.22 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जो लगभग 1.03 प्रतिशत की बढ़त दर्शाती है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है, इसलिए तेल की कीमत बढ़ने से आयात बिल बढ़ता है और रुपये पर दबाव बढ़ जाता है।
शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव
हालांकि भारतीय शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान हल्की बढ़त देखने को मिली।
- BSE Sensex करीब 139.28 अंक बढ़कर 74,703.20 पर पहुंच गया।
- Nifty 50 करीब 51.10 अंक चढ़कर 23,202.20 पर कारोबार करता दिखा।
लेकिन बाजार में अस्थिरता के कारण निवेशकों की सतर्कता बढ़ गई है, जिसका असर रुपये की मजबूती पर भी पड़ रहा है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली
शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने शुक्रवार को भारी बिकवाली की।
- विदेशी निवेशकों ने 10,716.64 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
विदेशी निवेश की निकासी से भी भारतीय मुद्रा पर दबाव बढ़ता है और रुपया कमजोर होता है।
विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट
भारतीय केंद्रीय बैंक Reserve Bank of India के ताजा आंकड़ों के अनुसार देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी घटा है।
- विदेशी मुद्रा भंडार 11.683 अरब डॉलर घटकर
- 716.810 अरब डॉलर रह गया है।
हालांकि इससे पहले विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था।
आगे क्या रहेगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहती हैं, तो भारतीय रुपये पर दबाव बना रह सकता है।
हालांकि केंद्रीय बैंक और सरकार की नीतियां बाजार को स्थिर करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

