India-Iran Relations: ‘जंग में जीत सकता है ईरान’, पूर्व RAW चीफ का बड़ा दावा, भारत-ईरान संबंधों पर अहम टिप्पणी

Middle East war के बीच पूर्व RAW चीफ Amarjeet Singh Dulat का बड़ा दावा—ईरान जीत सकता है जंग। जानिए India-Iran relations, Chabahar Port और भारत पर असर।

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच भारत और ईरान के रिश्तों को लेकर एक बड़ा बयान सामने आया है। भारत की खुफिया एजेंसी Research and Analysis Wing (RAW) के पूर्व प्रमुख Amarjeet Singh Dulat ने दावा किया है कि मौजूदा हालात में ईरान की स्थिति मजबूत दिखाई देती है और वह इस संघर्ष में बढ़त हासिल कर सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत और ईरान के संबंध ऐतिहासिक रूप से मजबूत रहे हैं, जो आज भी रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं।

क्या कहा पूर्व RAW प्रमुख ने?

ANI से बातचीत में अमरजीत सिंह दुलत ने कहा,

“भारत हमेशा से ईरान के साथ खड़ा रहा है और दोनों देशों के संबंध बहुत पुराने और गहरे हैं।”

उन्होंने मौजूदा मिडिल ईस्ट संकट को चिंताजनक बताया, लेकिन साथ ही यह भी संकेत दिया कि ईरान इस संघर्ष में मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है। हालांकि उन्होंने युद्ध को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए शांति की आवश्यकता पर जोर दिया।

मिडिल ईस्ट जंग का भारत पर असर

ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर सिर्फ क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी दिखाई दे रहा है।

  • कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उछाल
  • सप्लाई चेन में बाधा
  • ऊर्जा संकट का खतरा
  • भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर दबाव

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए लंबे समय तक ईरान पर निर्भर रहा है, इसलिए इस संघर्ष का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

भारत-ईरान रिश्तों का इतिहास

भारत और ईरान के संबंध दशकों पुराने हैं और कई उतार-चढ़ाव के बावजूद मजबूत बने रहे हैं:

🔹 स्वतंत्रता के बाद संबंध

  • भारत की आजादी के बाद दोनों देशों ने कूटनीतिक संबंध स्थापित किए
  • 1950-70 के दशक में ईरान का झुकाव अमेरिका की ओर था, फिर भी भारत से संबंध बनाए रखे

🔹 1979 की इस्लामिक क्रांति

  • ईरान की विदेश नीति में बड़ा बदलाव
  • भारत ने संतुलित रुख अपनाया और संबंध जारी रखे

🔹 आधुनिक दौर

  • ऊर्जा, व्यापार और कनेक्टिविटी में सहयोग बढ़ा
  • भारत ने ईरान के साथ रणनीतिक साझेदारी मजबूत की

चाबहार पोर्ट: रिश्तों की सबसे बड़ी कड़ी

भारत और ईरान के बीच सबसे अहम परियोजनाओं में से एक है
Chabahar Port

  • भारत इस पोर्ट के विकास में निवेश कर रहा है
  • अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सीधा रास्ता मिलता है
  • पाकिस्तान को बायपास करने का विकल्प

इसके अलावा
International North-South Transport Corridor (INSTC)
भी दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

आगे क्या?

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत के सामने संतुलन बनाए रखने की चुनौती है।

  • एक तरफ ईरान के साथ पुराने रिश्ते
  • दूसरी तरफ अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत आने वाले समय में “संतुलित कूटनीति” अपनाएगा, ताकि अपने आर्थिक और ऊर्जा हितों को सुरक्षित रख सके।

पूर्व RAW प्रमुख का बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि वैश्विक राजनीति में शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहा है। भारत और ईरान के रिश्ते न सिर्फ ऐतिहासिक हैं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की रणनीतिक जरूरतों के लिहाज से भी बेहद अहम हैं।

मिडिल ईस्ट की यह जंग जितनी लंबी चलेगी, उसका असर दुनिया की अर्थव्यवस्था और भारत जैसे देशों पर उतना ही गहरा पड़ेगा।