देश में दम तोड़ती मिडडे मील योजनाएं

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नई दिल्ली : देश में मिड डे मील योजना को जब लागु किया गया था तो ये दावे किये गए थे की इससे बच्चो को भरपेट खाना तो मिलेगा ही साथ ही कुपोषण से भी छुटकारा मिलेगा। वक्त के साथ साथ ये योजना विवादों में बनी रही कभी बच्चो के बीमार होने को लेकर तो कभी गन्दा खाना परोसे जाने को लेकर। सरकार की ओर से तमाम दावे किये गए की वो इस योजना को सफल करके रहेगी लेकिन हकीकत कभी भी सफलता की और बढ़ नही पायी।

अब चुकी केंद्र में मोदी सरकार है और संसद का सत्र भी चल रहा है तो मिड डे मील को लेकर एक विशाल रैली जंतर मंतर पर निकाली गयी। जिसमे हजारो की संख्या में देशभर से लोगो ने आकर भाग लिया और सरकार से मिड डे मील की क्वालिटी सुधारने और अच्छा खाना उपलब्ध करने की मांग की

जब हमारे पत्रकार ने कुछ समाजसेवकों से बात की तो उस दौरान ऋतू खेरा (सामाजिक कार्यकर्त्ता ) ने कहा कि हमारी मांग है की बच्चो के खाने में पोषक चीजो को शामिल किया जाना चाहिए। वहीँ स्वाति (सामाजिक कार्यकर्त्ता )हमारा कहना है की खाने में केला अंडा दूध दिया जाना चाहिए। मदन लाल (सदस्य दिल्ली मोबाइल क्रेस )आज हर दो में से एक बच्चा कुपोषित है।

आंकड़ों की माने तो आज देश में हर दूसरा बच्चा कुपोषण का शिकार है, जिसको लेकर के बच्चो से जुडी संस्थाओ और न्यायालयों का डंडा कई बार सरकार पर चल चूका है। लेकिन हालात जस के तस है इन लोगो ने सरकार से मांग की की मिड डे मील खाने का बजट बढ़ाया जाना चाहिए साथ ही एक बच्चे के खाने में एक अंडा,एक गिलास दूध,और दो केले अनिवार्य रूप से दिए जाने चाहिए,ताकि स्वच्छ भारत के साथ साथ स्वस्थ भारत का सपना भी साकार हो सके।

मोदी सरकार से लोगो को उम्मीदे तो बहुत है,शायद यही वजह है की जंतर मंतर पर पंहुची इस भारी भीड़ को उम्मीद है की उनकी बाते भी सुनी जाएँगी ।