America Tariff on India: अमेरिका ने Section 301 जांच के तहत भारत पर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है। जानिए भारत के पास क्या विकल्प हैं, GTRI ने क्या सुझाव दिया और इसका India-US Trade Deal पर क्या असर पड़ सकता है।
नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया के बीच एक नया विवाद सामने आ गया है। अमेरिका ने धारा 301 (Section 301) जांच के तहत भारत सहित 54 देशों पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि संबंधित देश बंधुआ मजदूरी (Forced Labor) से निर्मित उत्पादों के आयात को प्रभावी रूप से रोकने में विफल रहे हैं।
इस कदम ने भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में नई चिंता पैदा कर दी है, खासकर ऐसे समय में जब दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर 99 प्रतिशत बातचीत पूरी होने की बात कही जा रही है।
क्या है अमेरिका का नया टैरिफ प्रस्ताव?
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने धारा 301 के तहत जांच करते हुए भारत समेत 54 देशों पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है। अमेरिका का आरोप है कि ये देश बंधुआ मजदूरी से बने उत्पादों के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहे हैं।
हालांकि, भारत के प्रमुख आर्थिक शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने इस प्रस्ताव को नियमों के खिलाफ बताया है और कहा है कि भारत को इसका कड़ा विरोध करना चाहिए।
GTRI ने क्यों बताया नियमों के खिलाफ?
जीटीआरआई का कहना है कि धारा 301 का उपयोग आमतौर पर उन मामलों में किया जाता है जहां अमेरिकी कंपनियों को किसी देश के बाजार में प्रवेश करने में बाधाओं का सामना करना पड़ता है। लेकिन वर्तमान जांच बाजार पहुंच (Market Access) से जुड़ी नहीं है।
संस्थान के अनुसार, अमेरिका की जांच इस बात पर केंद्रित है कि क्या कोई देश तीसरे देशों से आने वाले कथित बंधुआ मजदूरी वाले उत्पादों के आयात को रोकता है या नहीं। यह धारा 301 के मूल दायरे से बाहर का मामला है।
जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के अनुसार, अमेरिका अपने घरेलू आयात नियंत्रण नियमों को अन्य देशों पर थोपने की कोशिश कर रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों की भावना के विपरीत है।
भारत के पास क्या हैं विकल्प?
विशेषज्ञों के मुताबिक भारत के पास इस प्रस्तावित टैरिफ का विरोध करने के लिए कई मजबूत तर्क मौजूद हैं।
1. WTO नियमों का हवाला
भारत यह तर्क दे सकता है कि 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क अमेरिका की विश्व व्यापार संगठन (WTO) प्रतिबद्धताओं से अधिक है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों का उल्लंघन करता है।
2. धारा 301 के दायरे पर सवाल
भारत यह भी कह सकता है कि बंधुआ मजदूरी से जुड़े मुद्दे बाजार पहुंच से संबंधित नहीं हैं, इसलिए धारा 301 के तहत इस प्रकार की कार्रवाई उचित नहीं है।
3. उत्पाद-विशिष्ट कार्रवाई की मांग
भारत यह तर्क दे सकता है कि यदि किसी विशेष उत्पाद को लेकर चिंता है तो कार्रवाई उत्पाद-विशिष्ट होनी चाहिए, न कि पूरे देश पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाए।
4. द्विपक्षीय वार्ता में मुद्दा उठाना
भारत इस विषय को चल रही भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं में प्रमुख मुद्दे के रूप में उठा सकता है और टैरिफ राहत की मांग कर सकता है।
60 देशों पर चल रही है कार्रवाई
अमेरिका ने यह जांच केवल भारत के खिलाफ नहीं बल्कि लगभग 60 देशों के खिलाफ शुरू की है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि संबंधित देश कथित बंधुआ मजदूरी से निर्मित वस्तुओं के आयात को रोकने के लिए कितने प्रभावी कदम उठा रहे हैं।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि कई मामलों में यह कदम व्यापारिक और रणनीतिक दबाव बनाने का माध्यम भी बन सकता है।
क्या व्यापार समझौते पर पड़ेगा असर?
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में टैरिफ का यह नया विवाद वार्ता को प्रभावित कर सकता है।
जीटीआरआई का मानना है कि यह कदम भारत पर अतिरिक्त दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है ताकि व्यापार समझौते में अमेरिका अपनी पसंद की शर्तों को शामिल करा सके।
हालांकि भारत सरकार अभी इस प्रस्ताव पर आधिकारिक प्रतिक्रिया देने की तैयारी में है और उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय बातचीत होगी।
आगे क्या?
व्यापार विशेषज्ञों के अनुसार भारत को इस प्रस्तावित टैरिफ का कानूनी और कूटनीतिक दोनों स्तरों पर विरोध करना चाहिए। साथ ही विश्व व्यापार संगठन के नियमों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार सिद्धांतों का हवाला देते हुए अपने हितों की रक्षा करनी चाहिए।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के अंतिम चरण में यह विवाद किस दिशा में जाता है और क्या दोनों देश व्यापार समझौते के साथ-साथ टैरिफ विवाद का भी समाधान निकाल पाते हैं।

