ममता बनर्जी को सबसे बड़ा झटका? सायोनी घोष के बागी खेमे में जाने की अटकलें, TMC में बढ़ा सियासी संकट

TMC Crisis News: तृणमूल कांग्रेस में बढ़ती बगावत के बीच सायोनी घोष के असंतुष्ट गुट का समर्थन करने की अटकलें तेज। ममता बनर्जी के लिए बढ़ी राजनीतिक चुनौती, जानें पूरा मामला।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ते असंतोष की चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब पार्टी की चर्चित युवा सांसद सायोनी घोष का नाम भी कथित बागी नेताओं की सूची में सामने आ रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, जादवपुर लोकसभा सीट से सांसद सायोनी घोष ने वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाले असंतुष्ट गुट को समर्थन दिया है। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो यह मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जाएगा।

TMC में बढ़ रही अंदरूनी नाराजगी

सूत्रों के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के भीतर लंबे समय से चल रही असंतोष की भावना अब खुलकर सामने आने लगी है। हाल ही में पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और सांसदों के इस्तीफों के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि संगठन के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है।

अब सायोनी घोष का नाम सामने आने से पार्टी नेतृत्व की चिंता और बढ़ सकती है। हालांकि, इस पूरे मामले पर अभी तक न तो सायोनी घोष और न ही तृणमूल कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है।

कौन हैं सायोनी घोष?

सायोनी घोष बंगाल की राजनीति में युवा और प्रभावशाली चेहरों में गिनी जाती हैं। अभिनय जगत से राजनीति में आने वाली सायोनी ने 2024 लोकसभा चुनाव में जादवपुर सीट से जीत हासिल की थी। उन्हें पार्टी की महिला इकाई का अध्यक्ष भी बनाया गया था और ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में उनकी गिनती होती रही है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान मंच से गाया गया उनका गीत “दिल में काबा, आंखों में मदीना” काफी चर्चा में रहा था। इसके बाद वह राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आई थीं।

आखिर क्यों नाराज बताई जा रही हैं सायोनी?

राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि सायोनी घोष पार्टी में अपने भविष्य को लेकर असहज महसूस कर रही थीं। बताया जा रहा है कि चुनाव प्रचार के दौरान विपक्ष के हमलों के समय उन्हें पार्टी नेतृत्व का पर्याप्त समर्थन नहीं मिला।

इसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि उनके चुनावी प्रचार अभियान को समय से पहले समाप्त करने के निर्देश दिए गए थे, जिससे उनकी नाराजगी और बढ़ गई। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।

काकोली घोष दस्तीदार का बढ़ता प्रभाव

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाला असंतुष्ट गुट लगातार मजबूत होता जा रहा है। कई नेताओं और सांसदों के इस गुट के संपर्क में होने की खबरें सामने आ रही हैं।

यदि पार्टी के प्रभावशाली नेताओं का समर्थन इस गुट को मिलता है, तो आगामी विधानसभा चुनावों से पहले टीएमसी के लिए यह एक गंभीर चुनौती बन सकती है।

लगातार मिल रहे हैं झटके

तृणमूल कांग्रेस को हाल के दिनों में कई राजनीतिक झटके लगे हैं।

राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने पार्टी से इस्तीफा दिया।
वरिष्ठ सांसद सुखेंदु शेखर रॉय भी पार्टी छोड़ चुके हैं।
कई नेताओं के असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।

इन घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि पार्टी के भीतर संगठनात्मक और नेतृत्व संबंधी चुनौतियां बढ़ रही हैं।

ममता बनर्जी के सामने बड़ी चुनौती

एक ओर भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस को अंदरूनी असंतोष का सामना करना पड़ रहा है।

अब सभी की नजरें ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी पर हैं कि वे पार्टी के भीतर उभरते इस संकट को किस तरह संभालते हैं और संगठन को एकजुट रखने में कितने सफल होते हैं।