खालिदा जिया का पाकिस्तान प्रेम: भारत-विरोधी राजनीति की विरासत, प्रणब मुखर्जी से मिलने से किया था इनकार

खालिदा जिया का पाकिस्तान प्रेम और भारत-विरोधी राजनीति का पूरा इतिहास। प्रणब मुखर्जी से मिलने से इनकार से लेकर बांग्लादेश में कट्टरवाद बढ़ने तक, पढ़ें बेगम खालिदा जिया की विवादास्पद विरासत।

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बांग्लादेश इस समय अपने सबसे गंभीर राजनीतिक और सामाजिक संकट से गुजर रहा है। देश में कट्टरवाद, हिंसा और अल्पसंख्यकों पर हमले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इसी बीच मंगलवार (30 दिसंबर) को बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की प्रमुख बेगम खालिदा जिया का ढाका में निधन हो गया।

खालिदा जिया के निधन के साथ ही बांग्लादेश की राजनीति में एक युग का अंत माना जा रहा है। वहीं उनके बेटे और BNP के कार्यवाहक प्रमुख तारिक रहमान आगामी आम चुनावों में प्रधानमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे बताए जा रहे हैं। बांग्लादेश में फरवरी में आम चुनाव प्रस्तावित हैं।

बचपन से पाकिस्तान तक का सफर

1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद खालिदा जिया का परिवार पश्चिम बंगाल से बांग्लादेश के दिनाजपुर चला गया। उनका मूल नाम खालिदा खानम पुतुल था। उन्होंने दिनाजपुर मिशनरी स्कूल और दिनाजपुर गर्ल्स स्कूल से शिक्षा प्राप्त की।

खालिदा जिया की शादी पाकिस्तानी सेना के अधिकारी कैप्टन जियाउर रहमान से हुई। वर्ष 1965 में विवाह के बाद वह पति के साथ पाकिस्तान चली गईं, जहां से उनका झुकाव पाकिस्तान समर्थक विचारधारा की ओर बढ़ता गया। यहीं से उन्होंने अपना नाम बदलकर खालिदा जिया रखा।

तीन बार बनीं बांग्लादेश की प्रधानमंत्री

खालिदा जिया ने बांग्लादेश की राजनीति में लंबा और प्रभावशाली सफर तय किया। वे तीन बार प्रधानमंत्री रहीं—

1991: बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं

फरवरी 1996: दूसरा कार्यकाल

2001–2006: तीसरा और सबसे विवादित कार्यकाल

उनकी राजनीति का आधार हमेशा भारत-विरोधी राष्ट्रवाद और पाकिस्तान व चीन के साथ नजदीकी रिश्ते रहे।

प्रणब मुखर्जी से मिलने से किया था इनकार

खालिदा जिया के भारत-विरोधी रुख का सबसे बड़ा उदाहरण मार्च 2013 में देखने को मिला, जब भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ढाका दौरे पर थे।

खालिदा जिया ने उनसे मिलने से साफ इनकार कर दिया। उस समय भारत में यूपीए सरकार थी। खालिदा का आरोप था कि कांग्रेस नेतृत्व वाली भारतीय सरकार, बांग्लादेश की तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को जरूरत से ज्यादा महत्व दे रही है।

भारत के खिलाफ खुला मोर्चा

खालिदा जिया ने अपने शासनकाल में भारत के बजाय पाकिस्तान और चीन के साथ रणनीतिक रिश्तों को प्राथमिकता दी।

  • उन्होंने 1972 की भारत-बांग्लादेश मैत्री संधि को “गुलामी की संधि” बताया
  • 1996 की गंगा जल संधि को “राष्ट्रीय हितों के खिलाफ सौदा” कहा
  • चटगांव हिल ट्रैक्ट्स शांति समझौते का खुलकर विरोध किया

उनके कार्यकाल में भारत-विरोधी तत्वों को खुला संरक्षण मिला। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने ढाका में अपनी मजबूत पकड़ बनाई। इसके साथ ही भारत के पूर्वोत्तर उग्रवादी संगठनों जैसे ULFA और NSCN को भी बांग्लादेश में पनाह मिलने के आरोप लगे।

भारत यात्राएं और सीमित संवाद

खालिदा जिया ने वर्ष 2006 में प्रधानमंत्री रहते हुए भारत की आधिकारिक यात्रा की और तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से मुलाकात की।

इसके अलावा उनकी सबसे चर्चित भारत यात्रा अक्टूबर 2012 में हुई, जब वे विपक्ष की नेता थीं। हालांकि इन यात्राओं के बावजूद भारत-बांग्लादेश रिश्तों में कोई ठोस सुधार नहीं हो सका।

एक विवादास्पद विरासत

खालिदा जिया की विरासत आज भी बांग्लादेश और भारत के संबंधों में बहस का विषय बनी हुई है। समर्थक उन्हें मजबूत राष्ट्रवादी नेता मानते हैं, जबकि आलोचक उन्हें कट्टरपंथ और भारत-विरोधी राजनीति को बढ़ावा देने वाली नेता बताते हैं।