पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के मतदान से ठीक पहले प्रदेश की सियासत ओपिनियन पोल के आंकड़ों के कारण और अधिक गर्मा गई है। तीन प्रमुख एजेंसियों — IANS-Matrize, Polstrat और Chanakya — द्वारा जारी किए गए ताजा सर्वे के अनुसार बिहार में एनडीए गठबंधन फिलहाल मजबूत स्थिति में दिख रहा है। वहीं, विपक्षी इंडिया गठबंधन की कोशिशों के बावजूद सत्ता परिवर्तन की संभावना कम दिखाई दे रही है।
मतदाता बदलाव के मूड में नहीं?
इन सर्वेक्षणों से यह संकेत मिलता है कि बिहार का मतदाता इस बार प्रयोग के मूड में नहीं है।
मतदाता वर्तमान में स्थिरता, मौजूदा नेतृत्व पर भरोसा और एनडीए की ग्रामीण व बूथ-स्तर की मजबूत पकड़ को प्राथमिकता दे रहा है।
साथ ही सर्वे बताते हैं कि भले ही विपक्ष बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और पलायन जैसे वास्तविक मुद्दों को उठा रहा हो, लेकिन संगठनात्मक एकजुटता और वैकल्पिक चेहरे की कमी उसे चुनौतीपूर्ण स्थिति में रख रही है।
तीनों ओपिनियन पोल के आंकड़े
सर्वे एजेंसी एनडीए सीट अनुमान इंडिया गठबंधन सीट अनुमान अन्य
IANS-Matrize 153–164 76–87 2–6
Polstrat 133–143 93–102 2–8
Chanakya 128–134 102–108 2–4
सर्वे औसत स्थिति
इन सभी के औसत को देखें तो:
- एनडीए लगभग 140 सीटों पर मजबूत दिखाई दे रहा है
- इंडिया गठबंधन को 76 से 108 सीटें मिलती दिख रही हैं
- अन्य दल 2 से 9 सीटों तक प्रभावी रह सकते हैं
चूंकि बिहार विधानसभा में कुल 243 सीटें हैं, इसलिए बहुमत के लिए 122 सीटों की आवश्यकता होती है।
इन आंकड़ों के अनुसार, एनडीए बहुमत की स्थिति से सुरक्षित और आरामदायक दूरी पर दिखाई देता है।
एनडीए की मजबूती के कारण
- नीतीश कुमार की स्थिर प्रशासनिक छवि
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और राष्ट्रीय प्रभाव
- बीजेपी-जेडीयू का बूथ स्तर तक फैला संगठनात्मक नेटवर्क
- विपक्ष की रणनीति में सामंजस्य की कमी
विपक्ष की स्थिति
इंडिया गठबंधन के पास रोजगार, गरीबी, शिक्षा और पलायन जैसे मजबूत मुद्दे हैं, लेकिन सर्वे यह दिखाते हैं कि वोटों को एक दिशा में एकजुट करने में विपक्ष अभी भी संघर्ष कर रहा है।
आरजेडी-कांग्रेस-लेफ्ट का गठबंधन मुद्दों की बात तो कर रहा है, लेकिन नेतृत्व और भरोसे की छवि को लेकर जनता में स्पष्ट एकमत नहीं दिख रहा।
पहले चरण के मतदान से पहले संदेश साफ?
पहले चरण के मतदान से ठीक पहले जारी हुए ये आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि बिहार का चुनाव ‘सत्ता परिवर्तन’ का नहीं बल्कि ‘सत्ता की निरंतरता’ की ओर बढ़ रहा है।
हालांकि, राजनीतिक जानकार यह भी कहते हैं कि चुनाव का असली फैसला मतदान के दिन मतदाता की चुप्पी तय करती है, इसलिए अंतिम तस्वीर आने में अभी समय है।
नतीजा साफ — बिहार की सियासी जंग दिलचस्प है, पर इस वक्त हवा एनडीए की ओर बहती नजर आती है।

