बरेली: उत्तर प्रदेश के बरेली में 26 सितंबर 2025 को हुई हिंसा को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस की एफआईआर के मुताबिक, यह घटना पूर्वनियोजित साजिश का नतीजा थी। आरोप है कि इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (आईएमसी) प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खान के निर्देश पर पार्टी के नेता नदीम और उसके साथियों ने भीड़ को हिंसा के लिए उकसाया।
नमाज के बाद भड़की हिंसा
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, जुमे की नमाज के बाद करीब 500 से 1000 लोग विभिन्न मोहल्लों से खलील तिराहे पर इकट्ठे हुए। भीड़ ने “गुस्ताख-ए-नबी की एक ही सजा, सर तन से जुदा” जैसे नारे लगाए और पुलिस बल पर हमला कर दिया। आरोपियों ने कहा था कि “आज अपना मकसद पूरा करेंगे, चाहे इसमें पुलिस वालों की हत्या ही क्यों न करनी पड़े।”
सोशल मीडिया से भड़काई भीड़
एफआईआर में उल्लेख है कि घटना से पहले मौलाना तौकीर रजा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर लोगों से सरकार विरोधी प्रदर्शन और धार्मिक नारे लगाने का आह्वान किया था। पुलिस ने पहले ही उन्हें नोटिस जारी कर चेतावनी दी थी, लेकिन इसके बावजूद भीड़ को भड़काया गया।
हमले में इस्तेमाल हुए हथियार
हिंसक भीड़ लाठी-डंडे, धारदार हथियार, ईंट-पत्थर और पेट्रोल बम जैसी घातक चीजें लेकर पहुंची थी। पुलिस पर अचानक जानलेवा हमला किया गया, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। भीड़ ने पुलिस की एंटी-रायट गन और वायरलेस सेट भी लूट लिए।
सरकारी व निजी संपत्ति को नुकसान
हिंसा के दौरान सरकारी और निजी संपत्तियों को भारी नुकसान हुआ। जीजीआईसी ऑडिटोरियम के शीशे तोड़े गए, बाउंड्री वॉल गिराई गई, पुलिस की गाड़ियां और मोटरसाइकिलें क्षतिग्रस्त हुईं। दुकानों और घरों में दहशत का माहौल फैल गया और आम जनता ने अपने घरों के दरवाजे बंद कर लिए।
पुलिस की कार्रवाई
स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस ने टियर गैस और लाठीचार्ज का सहारा लिया। मौके से कई मुख्य आरोपियों—सरफराज, मुनीफुद्दीन, अजीम अहमद, मोहम्मद शरीफ, मोहम्मद आमिर, रिहान और अन्य—को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने घटनास्थल से 253 ईंट-पत्थर, अवैध हथियार, लाठी-डंडे और टूटे बैरिकेड जब्त किए।
कानूनी शिकंजा
पुलिस ने मौलाना तौकीर रजा समेत आरोपियों के खिलाफ बीएनएसएस की धारा 109, 118, 121, 189, 191, 195, 196, 223, 310, 324 और लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।
माहौल बिगाड़ने की कोशिश
पुलिस का कहना है कि बरेली हिंसा एक सुनियोजित साजिश थी, जिसका मकसद धार्मिक सौहार्द बिगाड़ना और प्रशासनिक व्यवस्था को चुनौती देना था। घटना से समाज में भय का माहौल फैला और सांप्रदायिक तनाव बढ़ा।
फिलहाल पुलिस की कड़ी कार्रवाई के चलते हालात काबू में हैं, लेकिन इस खुलासे ने साफ कर दिया है कि यह हिंसा अचानक भड़की भीड़ की नहीं, बल्कि एक संगठित और योजनाबद्ध षड्यंत्र का नतीजा थी।


