नई दिल्ली/फिरोजाबाद: उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में इस साल की रामलीला का मंचन एक बार फिर हो सकेगा। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक को फिलहाल स्थगित कर दिया है। अदालत ने कहा कि यह आयोजन करीब 100 साल से लगातार हो रहा है, ऐसे में उत्सव को बीच में रोकना उचित नहीं होगा।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने कहा कि याचिका उस समय दाखिल की गई, जब इस साल का आयोजन पहले ही शुरू हो चुका था। अदालत ने सवाल उठाया कि यदि याचिकाकर्ता बच्चों की पढ़ाई को लेकर चिंतित थे, तो उन्हें पहले आवेदन करना चाहिए था।
विवाद की शुरुआत
फिरोजाबाद के टूंडला स्थित परिषदीय विद्यालय के मैदान में रामलीला आयोजित होती है। इस पर प्रदीप राणा नामक व्यक्ति ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। उनका आरोप था कि:
स्कूल का खेल मैदान अतिक्रमित कर लिया गया है।
बच्चों की पढ़ाई और खेल प्रभावित हो रहे हैं।
मैदान में सीमेंट की टाइल बिछा दी गई है, जिससे उसका स्वरूप बिगड़ गया है।
22 सितंबर को हाई कोर्ट ने इन दलीलों पर विचार करते हुए रामलीला आयोजन पर रोक लगा दी थी। आदेश के बाद स्थानीय प्रशासन ने कार्यक्रम रोक दिया।
आयोजन कमेटी का पक्ष
रामलीला आयोजन समिति ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए कहा कि:
याचिकाकर्ता ने जानबूझकर समिति को पक्षकार नहीं बनाया।
हाई कोर्ट ने एकतरफा आदेश पारित कर दिया।
रामलीला केवल शाम 7 से 10 बजे के बीच होती है, इसलिए पढ़ाई पर असर का तर्क सही नहीं है।
मैदान में सीमेंट की टाइल इसलिए लगाई गईं, क्योंकि बरसात में जगह पानी से भर जाती थी।
पिछले 100 वर्षों से वहीं पर रामलीला का मंचन होता आ रहा है और न तो स्कूल, न ही छात्रों या अभिभावकों ने कोई शिकायत की है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने कुछ देर की बहस के बाद कहा कि आयोजन समिति हाई कोर्ट में पक्षकार बनने का आवेदन दे। हाई कोर्ट सभी पक्षों – याचिकाकर्ता, आयोजन समिति और प्रशासन – को सुनकर अंतिम निर्णय दे।
फिलहाल, रामलीला पर लगी रोक को स्थगित कर दिया गया है। अदालत ने हाई कोर्ट से मामले की जल्द सुनवाई करने को कहा और यह भी सुझाव दिया कि भविष्य में आयोजन के लिए स्कूल मैदान की जगह वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने पर विचार हो सकता है।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से फिरोजाबाद में इस साल की रामलीला बिना बाधा पूरी हो सकेगी। अब सभी की नजरें इलाहाबाद हाई कोर्ट पर होंगी, जहां से इस विवाद का स्थायी समाधान निकल सकता है।

