Ranji Trophy: हाईकोर्ट के फैसले के बाद बदली मेघालय की पूरी टीम, खिलाड़ी नाराज

रणजी ट्रॉफी 2026-27 में मेघालय की पूरी टीम बदल दी गई। हाईकोर्ट के फैसले के बाद जेम्स संगमा ने नई टीम चुनी। राहुल दलाल समेत पुराने खिलाड़ी नाराज।

रणजी ट्रॉफी 2026-27 के प्लेट डिवीजन में मेघालय क्रिकेट टीम को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। नागालैंड के खिलाफ चौथे मुकाबले से ठीक पहले मेघालय की पूरी टीम बदल दी गई। मेघालय हाईकोर्ट के फैसले के बाद क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष जेम्स संगमा की ओर से नई टीम चुनी गई। पहले तीन मैच खेल चुके खिलाड़ियों को अचानक बाहर किए जाने से टीम में नाराजगी है।

भारतीय घरेलू क्रिकेट के प्रतिष्ठित टूर्नामेंट रणजी ट्रॉफी में इस बार मैदान के बाहर का विवाद सुर्खियों में है। मेघालय क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) के भीतर चल रही गुटबाजी का असर अब सीधे खिलाड़ियों पर पड़ा है। नागालैंड के खिलाफ प्लेट डिवीजन के चौथे मुकाबले से पहले मेघालय की पूरी टीम बदल दी गई। हैरानी की बात यह है कि जिन खिलाड़ियों ने सीजन के शुरुआती तीन मुकाबले खेले थे, वे चौथे मैच के लिए अभ्यास भी कर रहे थे, लेकिन अचानक उन्हें बता दिया गया कि अब वे टीम का हिस्सा नहीं हैं।

इस बड़े बदलाव के पीछे मेघालय क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष जेम्स संगमा और सचिव रेनॉल्ड खार्कमनी के बीच चल रहा विवाद बताया जा रहा है। मेघालय हाईकोर्ट के 30 अक्टूबर के फैसले के बाद एसोसिएशन के भीतर टीम चयन को लेकर स्थिति बदल गई और नई टीम मैदान पर उतरी।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद बदली पूरी टीम

मेघालय क्रिकेट एसोसिएशन में लंबे समय से अध्यक्ष जेम्स संगमा और सचिव रेनॉल्ड खार्कमनी के बीच विवाद चल रहा था। इसी विवाद के बीच एसोसिएशन की एपेक्स काउंसिल की ओर से चुनी गई टीम ने रणजी ट्रॉफी के शुरुआती तीन मुकाबले खेले थे।

मामला मेघालय हाईकोर्ट पहुंचा। अदालत ने अपने 30 अक्टूबर के आदेश में सचिव खार्कमनी के निलंबन को बरकरार रखा और एपेक्स काउंसिल की कुछ बैठकों में लिए गए फैसलों को अवैध घोषित कर दिया। इसके साथ ही उन फैसलों के आधार पर चुनी गई रणजी टीम की वैधता भी प्रभावित हुई।

इसके बाद अध्यक्ष जेम्स संगमा के पक्ष की ओर से नागालैंड के खिलाफ मुकाबले के लिए नई टीम का चयन किया गया। इस तरह पहले तीन मैच खेलने वाली पूरी टीम को बाहर होना पड़ा।

यौन उत्पीड़न की शिकायतों से शुरू हुआ विवाद

मेघालय क्रिकेट एसोसिएशन में विवाद की जड़ महिला क्रिकेट से जुड़ी शिकायतों को लेकर है। सचिव रेनॉल्ड खार्कमनी पर आरोप लगा था कि उन्होंने राज्य की अंडर-23 महिला टीम की खिलाड़ियों से जुड़ी यौन उत्पीड़न की शिकायतों पर उचित कार्रवाई नहीं की।

इसी विवाद के बीच उन्हें पद से निलंबित किया गया था। खार्कमनी ने इस कार्रवाई को चुनौती दी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने निलंबन को बरकरार रखा।

अदालत ने अपने आदेश में एसोसिएशन को यौन उत्पीड़न रोकथाम कानून (POSH Act, 2013) को सख्ती से लागू करने और खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए जरूरी व्यवस्था करने का निर्देश भी दिया।

तीन मैच खेल चुकी टीम को अचानक बाहर किया गया

जिस टीम को हटाया गया, उसने रणजी ट्रॉफी के शुरुआती तीन मुकाबलों में अच्छा प्रदर्शन किया था। टीम ने एक मैच में जीत दर्ज की थी, जबकि दो मुकाबलों में पहली पारी की बढ़त हासिल की थी। इसके बाद मेघालय प्लेट ग्रुप की अंक तालिका में दूसरे स्थान पर पहुंच गया था।

चौथे मुकाबले के लिए पुराने खिलाड़ी नियमित अभ्यास कर रहे थे। उन्हें उम्मीद थी कि वे नागालैंड के खिलाफ भी मैदान पर उतरेंगे। लेकिन मैच से ठीक पहले नई टीम की घोषणा कर दी गई।

नई टीम की कप्तानी पूर्व पंजाब के सलामी बल्लेबाज जीवनजोत सिंह को सौंपी गई। विकेटकीपर श्रीनिवास शरथ और ऑलराउंडर अक्षय कर्णेवार जैसे खिलाड़ी भी नई टीम में शामिल किए गए।

राहुल दलाल ने जताई नाराजगी, बोले- सब खिलाड़ी आहत हैं

टीम से बाहर किए गए अनुभवी बल्लेबाज राहुल दलाल ने अचानक हुए बदलाव पर नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि पुराने खिलाड़ी शनिवार और रविवार को भी अभ्यास कर रहे थे। उन्हें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि मैच से दो दिन पहले पूरी टीम बदल दी जाएगी।

राहुल दलाल के मुताबिक, रविवार को अभ्यास खत्म करके लौटने के बाद उन्हें पता चला कि उनके जाने के बाद दूसरी टीम ने मैदान पर अभ्यास किया था। इसके बाद देर रात तक नई टीम के खिलाड़ियों का पंजीकरण और घोषणा की प्रक्रिया पूरी की गई।

दलाल ने कहा कि पुराने खिलाड़ियों ने शुरुआती तीन मुकाबलों में मेहनत की थी और टीम अच्छा प्रदर्शन कर रही थी। अचानक पूरी टीम बदल दिए जाने से सभी खिलाड़ी निराश और आहत हैं। उन्होंने यह भी बताया कि खिलाड़ियों ने अंत में नई टीम के सदस्यों को शुभकामनाएं दीं और अपने किट बैग लेकर लौट गए।

BCCI ने कहा- हाईकोर्ट के आदेश का पालन करना जरूरी

इस पूरे विवाद पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के सचिव देवजीत सैकिया ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बोर्ड के सामने हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।

सैकिया के मुताबिक, मेघालय क्रिकेट एसोसिएशन में अध्यक्ष और सचिव के पक्षों के बीच कानूनी विवाद चल रहा था। अदालत का फैसला अध्यक्ष जेम्स संगमा के पक्ष में आने के बाद उनकी ओर से चुनी गई टीम को खेलने की अनुमति देनी पड़ी।

BCCI ने साफ किया कि वह अदालत के निर्देशों के खिलाफ जाकर पुरानी टीम को मैदान पर उतारने का फैसला नहीं कर सकता था।

खिलाड़ियों के भविष्य पर भी सवाल

इस विवाद ने घरेलू क्रिकेट में खिलाड़ियों के भविष्य और राज्य क्रिकेट संघों की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसी टीम में चयन के बाद खिलाड़ी पूरे सीजन की तैयारी करते हैं, अभ्यास करते हैं और राज्य का प्रतिनिधित्व करने के लिए मेहनत करते हैं। ऐसे में प्रशासनिक विवाद के कारण पूरी टीम का अचानक बदल जाना खिलाड़ियों के करियर और मनोबल पर असर डाल सकता है।

मेघालय के पुराने खिलाड़ियों के सामने अब यह सवाल है कि आगे के मुकाबलों में उन्हें मौका मिलेगा या नहीं। वहीं, एसोसिएशन के भीतर विवाद का असर राज्य की अन्य टीमों के चयन पर भी पड़ सकता है।

रणजी ट्रॉफी जैसे बड़े घरेलू टूर्नामेंट में इस तरह का घटनाक्रम क्रिकेट प्रशासन के लिए भी चिंता का विषय है। अब देखना होगा कि मेघालय क्रिकेट एसोसिएशन इस विवाद को कैसे सुलझाता है और प्रभावित खिलाड़ियों के भविष्य को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।