दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को पूछताछ के लिए बुलाया है। दोनों नेता राजौरी गार्डन स्थित क्राइम ब्रांच कार्यालय पहुंचे। पुलिस जंतर-मंतर पर बिना अनुमति प्रदर्शन, सरकारी आदेश की अवहेलना और दूसरे की संपत्ति में प्रवेश से जुड़े तीन मामलों की जांच कर रही है।
दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मामलों में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दोनों नेताओं को पूछताछ के लिए तलब किया है। दोनों को राजौरी गार्डन स्थित क्राइम ब्रांच कार्यालय में पेश होने के लिए बुलाया गया था, जहां वे करीब सुबह 11:15 बजे पहुंचे।
जानकारी के मुताबिक, पुलिस दोनों नेताओं से तीन अलग-अलग आरोपों से जुड़े मामलों में सवाल-जवाब कर सकती है। इनमें सरकारी आदेश का पालन नहीं करना, बिना अनुमति जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शन करना और दूसरे की संपत्ति में प्रवेश करना शामिल है।
इससे पहले अक्टूबर में भी दिल्ली पुलिस ने दोनों नेताओं को समन जारी किया था। हालांकि, वे निर्धारित समय पर पूछताछ के लिए पेश नहीं हुए थे और बाद में क्राइम ब्रांच के सामने उपस्थित होने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था।
जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े मामलों की जांच कर रही क्राइम ब्रांच
CJP नेताओं के खिलाफ दर्ज विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मामलों की जांच अक्टूबर में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई थी। ये मामले 13 अक्टूबर की उस घटना से जुड़े हैं, जब सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे समेत 14 लोग जंतर-मंतर पहुंचे थे।
पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों के पास वहां विरोध-प्रदर्शन करने की आवश्यक अनुमति नहीं थी। इसके बाद पुलिस ने सभी को हिरासत में ले लिया था। घटना के बाद से ही इस मामले को लेकर कानूनी कार्रवाई जारी है।
एक सप्ताह न्यायिक हिरासत में रहे थे सौरव दास और आशुतोष रांका
13 अक्टूबर की घटना के बाद CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। दोनों करीब एक सप्ताह तक हिरासत में रहे। वहीं, अजिंक्य शिंदे को शांति बनाए रखने से संबंधित बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने के बाद रिहा कर दिया गया था।
बाद में 21 अक्टूबर को सौरव दास और आशुतोष रांका को 50-50 हजार रुपये के जमानत बॉन्ड पर रिहा किया गया। इसके लिए दोनों को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने लिखित बयान देना पड़ा था।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन नहीं करने का दिया था आश्वासन
रिहाई के दौरान सौरव दास और आशुतोष रांका ने शांति बनाए रखने का आश्वासन दिया था। उन्होंने लिखित रूप से कहा था कि जब तक कानून के तहत जंतर-मंतर को दोबारा विरोध-प्रदर्शन के लिए अधिकृत नहीं किया जाता, तब तक वे वहां प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे।
अब क्राइम ब्रांच दोनों नेताओं से इसी पूरे घटनाक्रम और दर्ज मामलों के संबंध में पूछताछ कर रही है। जांच के दौरान पुलिस यह जानने की कोशिश करेगी कि 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर पहुंचने और कथित रूप से नियमों का उल्लंघन करने के पीछे क्या परिस्थितियां थीं।
फिलहाल पूछताछ के बाद पुलिस की ओर से आगे की कार्रवाई को लेकर कोई अंतिम जानकारी सामने नहीं आई है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि इन मामलों में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।

