अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट आज 2 नवंबर को सुनवाई करेगा। जानें चार याचिकाओं, एसआईटी की जांच, 105 कथित घटनाओं और आठ आरोपियों की चार्जशीट से जुड़ी पूरी जानकारी।
Ayodhya Ram Mandir Donation Case: अयोध्या के राम मंदिर में दान की रकम के कथित गबन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट सोमवार, 2 नवंबर 2026 को सुनवाई करेगा। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ जांच से जुड़े दस्तावेजों और एसआईटी की चार्जशीट पर विचार कर सकती है। इस मामले में कुल चार याचिकाएं दायर की गई हैं। एसआईटी ने आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है और जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज में नकदी को कथित तौर पर अनधिकृत तरीके से निकालने या छिपाने की 105 घटनाएं सामने आई थीं।
नई दिल्ली: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में भक्तों की ओर से दिए गए चंदे की रकम में कथित गड़बड़ी का मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सोमवार को देश की शीर्ष अदालत इस मामले में सुनवाई करेगी। पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार और विशेष जांच दल (SIT) से जांच की प्रगति की जानकारी ली थी और चार्जशीट दाखिल होने के बाद उसकी एक प्रति सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा था।
इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ कर रही है। याचिकाकर्ताओं की ओर से मंदिर ट्रस्ट के चंदे के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, फॉरेंसिक ऑडिट और अदालत की निगरानी में जांच कराने जैसी मांगें उठाई गई हैं।
राम मंदिर चंदा मामले में कितनी याचिकाएं दायर?
राम मंदिर में दान की रकम से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कुल चार याचिकाएं दायर की गई हैं। इनमें अलग-अलग याचिकाकर्ताओं ने जांच और मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन को लेकर सवाल उठाए हैं।
इन याचिकाओं में शामिल हैं:
- नरेंद्र कुमार गोस्वामी: अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी की ओर से एक रिट याचिका दायर की गई है।
- अजय कुमार राय: अजय कुमार राय ने आपराधिक रिट याचिका दाखिल की है और स्वयं अपना पक्ष रख रहे हैं।
- सुधाकर सिंह: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह ने भी इस मामले में अलग याचिका दायर की है।
- हिंदू धर्म परिषद: संगठन की ओर से भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है।
इन याचिकाओं में कथित वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र और प्रभावी जांच तथा मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
SIT की जांच में सामने आईं 105 कथित घटनाएं
21 सितंबर 2026 को हुई पिछली सुनवाई में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट को एसआईटी की जांच रिपोर्ट के बारे में जानकारी दी गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर परिसर के पिलग्रिम फैसिलिटी सेंटर (PFC) स्थित नकदी गिनने वाले कक्ष के सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच में 105 ऐसी घटनाएं सामने आईं, जिनमें नकदी को कथित तौर पर बिना अनुमति निकाला गया या छिपाया गया था।
एसआईटी ने इन घटनाओं के आधार पर आठ आरोपियों की पहचान की थी। जांच में बैंक खातों में जमा संदिग्ध रकम, संपत्तियों और कथित रूप से गबन की गई राशि का भी विश्लेषण किया गया।
अदालत को यह भी बताया गया था कि जांच में मंदिर के कर्मचारियों, बैंक अधिकारियों, सुरक्षा कर्मियों और अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं।
आठ आरोपियों के खिलाफ दाखिल हो चुकी है चार्जशीट
इस मामले में एक अहम घटनाक्रम यह है कि एसआईटी ने सितंबर 2026 में ही आठ आरोपियों के खिलाफ स्थानीय अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। 24 सितंबर को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, चार्जशीट हजारों पन्नों की है और इसमें वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों, संपत्तियों, सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य साक्ष्यों का विवरण शामिल है।
जांच एजेंसी ने कथित तौर पर मंदिर में नकदी की गिनती के दौरान हुई अनधिकृत निकासी और उसे छिपाने की घटनाओं पर विशेष ध्यान दिया है। अब सुप्रीम कोर्ट की ओर से चार्जशीट की प्रति मांगे जाने के बाद जांच के निष्कर्षों की न्यायिक समीक्षा का महत्व बढ़ गया है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि चार्जशीट में लगाए गए आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। आरोपियों को दोषी ठहराने का अंतिम फैसला संबंधित अदालत करेगी।
कीमती चढ़ावे की जांच में क्या मिला?
एसआईटी की रिपोर्ट में नकदी के कथित गबन के अलावा मंदिर को मिले कीमती चढ़ावों की भी जांच की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, सॉफ्टवेयर के जरिए रसीद जारी किए गए 803 कीमती चढ़ावों के रिकॉर्ड का सत्यापन किया गया और उनकी जांच में कोई गड़बड़ी नहीं मिली।
इसके अलावा कुछ अन्य कीमती वस्तुओं का भी अलग से भौतिक सत्यापन किया गया। रिपोर्ट में चांदी की ईंटों और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं से जुड़े रिकॉर्ड की जांच का भी उल्लेख किया गया था।
इससे स्पष्ट है कि जांच में हर प्रकार के चढ़ावे को एक ही श्रेणी में नहीं रखा गया। नकदी की गिनती के दौरान सामने आई कथित अनधिकृत निकासी और कीमती वस्तुओं के सत्यापन के निष्कर्ष अलग-अलग हैं।
21 सितंबर की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?
21 सितंबर को हुई सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया था कि एसआईटी की जांच काफी हद तक पूरी हो चुकी है। उन्होंने चार्जशीट दाखिल किए जाने की जानकारी दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि वह इस स्तर पर स्थानीय अदालत के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं करना चाहता। हालांकि, अदालत ने कहा था कि जांच की समीक्षा के लिए चार्जशीट की प्रति उसके सामने प्रस्तुत की जाए।
पीठ ने यह भी कहा था कि यदि आगे कोई साक्ष्य सामने आता है तो कानून के तहत आगे की जांच का रास्ता खुला रहेगा।
आज की सुनवाई पर क्यों टिकी हैं नजरें?
2 नवंबर की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के सामने जांच और चार्जशीट से जुड़े दस्तावेज महत्वपूर्ण रहेंगे। याचिकाकर्ताओं की ओर से उठाए गए सवालों, एसआईटी की जांच और मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों पर अदालत का रुख अहम हो सकता है।
हालांकि, सुनवाई से पहले यह मान लेना उचित नहीं होगा कि अदालत किसी विशेष जांच एजेंसी को जांच सौंपने या मंदिर ट्रस्ट के खिलाफ कोई निश्चित आदेश देने जा रही है। अदालत के आदेश और आगे की कार्रवाई सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगी।
राम मंदिर में भक्तों की आस्था से जुड़ा यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें दान की रकम के प्रबंधन, वित्तीय पारदर्शिता और संस्थागत जवाबदेही जैसे सवाल शामिल हैं। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और उसके अगले निर्देशों पर है।

