UCC News: नीतीश कुमार की 2017 की चिट्ठी फिर चर्चा में, UCC पर क्या था उनका रुख? अब JD(U) क्या करेगी

UCC News: अमित शाह के 2029 से पहले NDA शासित राज्यों में UCC लागू करने के बयान के बीच नीतीश कुमार की 2017 की चिट्ठी चर्चा में है। जानें तब उन्होंने UCC पर क्या कहा था और अब JD(U) का रुख क्या है।

UCC News: यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर बिहार की राजनीति में बहस फिर तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 2029 से पहले सभी NDA शासित राज्यों में UCC लागू करने के बयान के बीच नीतीश कुमार की 2017 की चिट्ठी चर्चा में है। उस समय नीतीश कुमार ने विधि आयोग से कहा था कि UCC जैसे संवेदनशील मुद्दे पर व्यापक सहमति और सभी पक्षों से चर्चा जरूरी है। वहीं, मौजूदा समय में JD(U) ने कहा है कि प्रस्तावित कानून का प्रारूप और प्रावधान सामने आने के बाद ही पार्टी अपना रुख तय करेगी।

2017 में नीतीश कुमार ने विधि आयोग को क्या लिखा था?

साल 2017 में बिहार के मुख्यमंत्री और JD(U) के नेता नीतीश कुमार ने तत्कालीन विधि आयोग के अध्यक्ष जस्टिस बीएस चौहान को UCC को लेकर पत्र लिखा था।

12 जनवरी 2017 के पत्र में नीतीश कुमार ने कहा था कि प्रस्तावित UCC की स्पष्ट जानकारी और उसके स्वरूप के अभाव में इस पर कोई ठोस राय बनाना संभव नहीं है। उन्होंने विधि आयोग की प्रश्नावली को लेकर भी आपत्ति जताई थी और कहा था कि सवाल इस तरह तैयार किए गए हैं कि जवाब देने वाले को सीमित विकल्पों में उत्तर देना पड़े।

नीतीश कुमार ने यह भी कहा था कि UCC को जल्दबाजी में लागू करने के बजाय इस विषय पर संसद, राज्य विधानसभाओं और नागरिक समाज के विभिन्न मंचों पर विस्तृत बहस होनी चाहिए।

‘व्यापक सहमति के बिना UCC लागू करने से सामाजिक असहमति बढ़ सकती है’

2017 के अपने रुख में नीतीश कुमार ने भारत की सामाजिक और धार्मिक विविधता का उल्लेख किया था। उनका कहना था कि देश में अलग-अलग समुदायों के व्यक्तिगत कानून और लंबे समय से चली आ रही परंपराएं हैं, इसलिए UCC पर आगे बढ़ने से पहले सभी संबंधित पक्षों को विश्वास में लेना जरूरी है।

उन्होंने यह भी कहा था कि विभिन्न धार्मिक समूहों, खासकर अल्पसंख्यक समुदायों के बीच सहमति बनाए बिना UCC लागू करने की कोशिश सामाजिक असहमति पैदा कर सकती है और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े संवैधानिक भरोसे को प्रभावित कर सकती है।

25 जनवरी 2017 को JD(U) अध्यक्ष के तौर पर भी दिया था रुख

UCC पर नीतीश कुमार की चर्चा सिर्फ बिहार सरकार के पत्र तक सीमित नहीं रही थी। जनवरी 2017 में JD(U) अध्यक्ष के तौर पर भी उन्होंने विधि आयोग को अपनी राय भेजी थी।

इस पत्र में उन्होंने कहा था कि UCC को लोगों के कल्याण और सुधार के उपाय के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि ऐसा राजनीतिक माध्यम जिसके जरिए इसे जल्दबाजी में लागू किया जाए। उन्होंने UCC को टिकाऊ बनाने के लिए व्यापक सहमति की आवश्यकता पर जोर दिया था।

यही वजह है कि मौजूदा UCC बहस में 2017 का यह रुख JD(U) की वर्तमान स्थिति को समझने के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ बन गया है।

UCC पर अमित शाह के बयान के बाद फिर बढ़ी राजनीतिक हलचल

UCC पर मौजूदा बहस केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 13 सितंबर 2026 के बयान के बाद तेज हुई। शाह ने कहा था कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले BJP-NDA शासित सभी 21 राज्यों में UCC लागू किया जाएगा।

इसके बाद NDA के सहयोगी दलों के रुख पर चर्चा शुरू हो गई है। खास तौर पर बिहार में JD(U) का रुख राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है।

JD(U) ने कहा- पहले ड्राफ्ट और प्रावधान देखेंगे

मौजूदा स्थिति में JD(U) ने UCC पर सीधे समर्थन या विरोध का अंतिम फैसला घोषित नहीं किया है।

बिहार के उपमुख्यमंत्री और JD(U) के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी ने 15 सितंबर 2026 को कहा कि पार्टी पहले प्रस्तावित कानून को विस्तार से देखेगी और उसके प्रावधानों के आधार पर अपना रुख तय करेगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि किसी प्रावधान को लेकर आपत्ति या चिंता सामने आती है तो केंद्र के साथ उस पर बातचीत की जाएगी।

इस रुख से संकेत मिलता है कि JD(U) फिलहाल UCC के सिद्धांत पर तत्काल अंतिम फैसला लेने के बजाय प्रस्तावित कानून के वास्तविक स्वरूप का इंतजार कर रही है।

2017 की चिट्ठी और 2026 का रुख—क्या बदला?

नीतीश कुमार के 2017 के पत्र और JD(U) के मौजूदा बयान में एक समानता दिखाई देती है—कानून के प्रावधानों को समझने और व्यापक चर्चा की जरूरत।

2017 में नीतीश कुमार ने प्रस्तावित UCC का विस्तृत स्वरूप सामने नहीं होने और व्यापक सहमति के अभाव को अपनी चिंता का आधार बनाया था।

वहीं 2026 में JD(U) कह रही है कि पहले UCC का ड्राफ्ट और उसके प्रावधान सामने आएं, उसके बाद पार्टी अपना फैसला करेगी।

हालांकि दोनों परिस्थितियों की राजनीतिक पृष्ठभूमि अलग है, इसलिए केवल पुराने पत्र के आधार पर JD(U) के वर्तमान अंतिम रुख का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

UCC और संविधान का अनुच्छेद 44 क्या कहता है?

UCC का संवैधानिक आधार अनुच्छेद 44 में मिलता है। संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों में कहा गया है कि राज्य भारत के सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा।

यह प्रावधान नीति-निर्देशक तत्वों का हिस्सा है। इसलिए इसका स्वरूप मौलिक अधिकारों वाले प्रावधानों से अलग है।

UCC के तहत आम तौर पर विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और अन्य व्यक्तिगत मामलों से जुड़े कानूनों में समानता की बात की जाती है। हालांकि किसी प्रस्तावित UCC में वास्तव में कौन-कौन से प्रावधान होंगे, यह उसके अंतिम कानून या राज्यवार कानून के स्वरूप पर निर्भर करेगा।

अब नजर JD(U) और BJP की बातचीत पर

अमित शाह के 2029 से पहले 21 NDA शासित राज्यों में UCC लागू करने के लक्ष्य के बाद अब NDA के भीतर सहयोगी दलों के साथ बातचीत महत्वपूर्ण हो गई है।

JD(U) की ओर से फिलहाल यही संकेत है कि पार्टी प्रस्तावित कानून का अध्ययन करने के बाद फैसला करेगी। ऐसे में आने वाले दिनों में UCC का ड्राफ्ट सामने आने पर बिहार में राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है।

2017 की नीतीश कुमार की चिट्ठी इस बहस में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदर्भ जरूर बन गई