US Iran War Latest News: अमेरिका के हमलों के बाद ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों का दावा किया। जानिए पूरा घटनाक्रम, दोनों देशों के दावे और मिडिल ईस्ट पर बढ़ते संकट का विश्लेषण।
नई दिल्ली: मध्य पूर्व (Middle East) में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब और गंभीर होता दिखाई दे रहा है। ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के जवाब में बहरीन, कुवैत और जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन हमलों का निशाना बनाया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है। इस घटनाक्रम के बाद पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान का जवाबी दावा
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के अनुसार, अमेरिका द्वारा ईरानी सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर हमलों के जवाब में बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया।
IRGC का दावा है कि:
- जॉर्डन के प्रिंस हसन एयरबेस के ईंधन भंडारण क्षेत्र और मिसाइल डिपो को निशाना बनाया गया।
- बहरीन में अमेरिकी ड्रोन कमांड सेंटर पर हमला किया गया।
- कुवैत में भी अमेरिकी सैन्य गतिविधियों से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया।
ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई नहीं रोकता है तो भविष्य में और भी कड़े जवाब दिए जाएंगे।
जॉर्डन और कुवैत का क्या कहना है?
जॉर्डन की सेना ने दावा किया है कि उसने ईरान की ओर से दागी गई चार मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया।
वहीं कुवैत ने कहा कि उसका एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह सक्रिय है और कई संदिग्ध मिसाइलों तथा ड्रोन को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया गया। सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे देश में हाई अलर्ट जारी कर दिया है।
अमेरिका ने भी तेज किए सैन्य अभियान
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी सेना ने हाल के दिनों में ईरान के कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक:
- तीन दिनों में 300 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।
- हालिया अभियान में लगभग 140 सैन्य लक्ष्यों पर कार्रवाई की गई।
- इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना बताया गया।
हालांकि अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) ने सभी दावों पर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
कुवैत में भी हुआ नुकसान
कुवैत सरकार के अनुसार:
- उत्तरी सीमा पर स्थित तीन सुरक्षा चौकियों को नुकसान पहुंचा है।
- एक ऑफशोर ऑयल ड्रिलिंग प्लेटफॉर्म पर ड्रोन हमला हुआ।
- इस घटना में एक कर्मचारी घायल होने की सूचना है।
सरकार ने तेल प्रतिष्ठानों और सामरिक ठिकानों की सुरक्षा और बढ़ा दी है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ा युद्ध का खतरा
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता बढ़ा दी है। बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल की कीमतों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।
स्थिति पर दुनिया की नजर
दुनिया के कई देश दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र सहित कई अंतरराष्ट्रीय संगठन क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर चिंता जता चुके हैं। फिलहाल दोनों देशों की ओर से सैन्य गतिविधियां जारी हैं और हालात पर वैश्विक समुदाय की करीबी नजर बनी हुई है।
निष्कर्ष
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य संघर्ष अब पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। ईरान द्वारा बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा और अमेरिका की लगातार सैन्य कार्रवाई इस संकट को और गहरा सकती है। आने वाले दिनों में दोनों देशों की रणनीति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रयास तय करेंगे कि यह तनाव कम होगा या व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का रूप लेगा।

