WHO समर्थित नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दुनिया अगली महामारी के लिए अभी भी पूरी तरह तैयार नहीं है. इबोला, मंकीपॉक्स और बर्ड फ्लू जैसे बढ़ते संक्रमणों के बीच वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं.
Global Health Crisis / Pandemic Preparedness Report: कोविड-19 महामारी के बाद दुनिया ने यह उम्मीद की थी कि भविष्य में किसी भी वैश्विक स्वास्थ्य संकट से निपटने की तैयारी पहले से ज्यादा मजबूत होगी. लेकिन अब एक नई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट ने इस भरोसे पर सवाल खड़े कर दिए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया अगली महामारी के लिए अभी भी पूरी तरह तैयार नहीं है और कई मामलों में पहले से ज्यादा कमजोर स्थिति में पहुंच चुकी है.
तेजी से बढ़ रहा है नई महामारियों का खतरा
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) और वर्ल्ड बैंक के समर्थन से गठित स्वतंत्र संस्था Global Preparedness Monitoring Board (GPMB) की नई रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया में संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है. रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक दशक की तुलना में अब स्वास्थ्य व्यवस्थाएं महामारी से उबरने में कम सक्षम हो गई हैं.
यह रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब अफ्रीका के कई देशों में इबोला वायरस का नया प्रकोप देखा जा रहा है. इसके अलावा हंतावायरस, मंकीपॉक्स और बर्ड फ्लू जैसी बीमारियों का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है.
इबोला के नए स्ट्रेन ने बढ़ाई चिंता
WHO ने हाल ही में कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और युगांडा में फैले इबोला संक्रमण को अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है. इस बार इबोला का कम ज्ञात Bundibugyo strain सामने आया है, जिसने वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है.
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के नए वायरस स्ट्रेन भविष्य में महामारी का बड़ा कारण बन सकते हैं, खासकर तब जब स्वास्थ्य व्यवस्थाएं पहले से कमजोर हों.
रिपोर्ट में किन बड़े खतरों का जिक्र?
79वीं वर्ल्ड हेल्थ असेंबली के दौरान जारी रिपोर्ट “A World on the Edge: Priorities for a Pandemic-Resilient Future” में कई गंभीर चुनौतियों का जिक्र किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार:
- भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है
- जलवायु परिवर्तन पर्यावरणीय अस्थिरता बढ़ा रहा है
- अंतरराष्ट्रीय यात्रा और वैश्विक आवाजाही तेजी से बढ़ रही है
- स्वास्थ्य क्षेत्र में फंडिंग घट रही है
- गरीब देशों तक वैक्सीन और दवाओं की पहुंच अब भी सीमित है
रिपोर्ट में कहा गया कि महामारी से निपटने के लिए किए जा रहे निवेश वर्तमान खतरों के मुकाबले बेहद कम हैं.
कोविड के बाद भी नहीं सुधरी वैश्विक तैयारी
रिपोर्ट में कोविड-19, मंकीपॉक्स और 2014-16 तथा 2019-20 के इबोला प्रकोप की समीक्षा की गई. इसमें पाया गया कि कोविड महामारी के बाद कई देशों ने नई स्वास्थ्य नीतियां तो बनाईं, लेकिन वास्तविक तैयारी अब भी बेहद असमान बनी हुई है.
सबसे बड़ी चिंता वैक्सीन वितरण को लेकर जताई गई. रिपोर्ट के मुताबिक मंकीपॉक्स वैक्सीन गरीब देशों तक पहुंचने में लगभग दो साल लग गए, जो कोविड वैक्सीन वितरण से भी अधिक देरी थी.
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अगली महामारी अधिक घातक हुई, तो विकासशील देशों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है.
गलत सूचना और राजनीतिक ध्रुवीकरण भी बड़ा खतरा
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि महामारी अब सिर्फ स्वास्थ्य संकट नहीं रह गई है, बल्कि यह लोकतंत्र, सामाजिक विश्वास और वैज्ञानिक संस्थाओं पर भी असर डाल रही है.
कोविड और इबोला जैसी महामारियों के दौरान:
- सोशल मीडिया पर गलत सूचनाएं तेजी से फैलीं
- वैज्ञानिक संस्थाओं पर भरोसा कम हुआ
- राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ा
- स्वास्थ्य नियमों का विरोध देखने को मिला
रिपोर्ट ने चेतावनी दी कि भविष्य में यदि इन चुनौतियों पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो अगली महामारी का असर और भी गंभीर हो सकता है.
विशेषज्ञों ने क्या दी सलाह?
रिपोर्ट में देशों से अपील की गई है कि वे:
- हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करें
- वैक्सीन रिसर्च में निवेश बढ़ाएं
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करें
- डिजिटल हेल्थ निगरानी सिस्टम विकसित करें
- गरीब देशों को समान स्वास्थ्य संसाधन उपलब्ध कराएं
विशेषज्ञों का मानना है कि महामारी से निपटने के लिए केवल दवाएं और अस्पताल पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि मजबूत वैश्विक सहयोग और भरोसेमंद स्वास्थ्य तंत्र की भी जरूरत है.

