ईरान-अमेरिका तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के बाद LNG से भरा पहला टैंकर सुरक्षित भारत पहुंच गया है। 62,370 मीट्रिक टन LNG लेकर आया टैंकर दिशा गुजरात के दाहेज पोर्ट पहुंचा। जानिए इसका भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा।
नई दिल्ली/दाहेज: प्राकृतिक गैस आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान-अमेरिका तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में उत्पन्न संकट के बाद तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) लेकर आने वाला पहला टैंकर सुरक्षित रूप से भारत पहुंच गया है।
LNGC दिशा (Disha) नामक यह टैंकर गुजरात के दाहेज बंदरगाह पहुंच चुका है। माल्टा के झंडे वाले इस जहाज में करीब 62,370 मीट्रिक टन LNG लोड है। इसे ईरान संकट के बाद होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत पहुंचने वाला पहला भारतीय चार्टर्ड LNG टैंकर माना जा रहा है।
दाहेज पोर्ट पर पहुंचा LNGC दिशा
गुजरात के भरूच बंदरगाह प्राधिकरण के अनुसार, LNGC दिशा शुक्रवार सुबह दाहेज बंदरगाह पहुंचा और फिलहाल पेट्रोनेट LNG जेटी पर खड़ा है।
यह टैंकर शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम द्वारा संचालित किया जा रहा है, जबकि इसे भारत की प्रमुख गैस आयातक कंपनी Petronet LNG Limited ने चार्टर किया है।
युद्ध के बाद होर्मुज पार करने वाला पहला टैंकर
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच शुरुआती युद्धविराम (Ceasefire) की घोषणा के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले पहले वाणिज्यिक जहाजों में LNGC दिशा शामिल है।
बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) के अधिकारियों ने पहले ही संकेत दिया था कि यह जहाज 15 जून को होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुका है और 62,370 मीट्रिक टन LNG लेकर भारत की ओर बढ़ रहा है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह खेप?
भारत अपनी कुल प्राकृतिक गैस जरूरतों का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा LNG आयात के जरिए पूरा करता है। इनमें से करीब 65 प्रतिशत LNG आपूर्ति कतर और अन्य खाड़ी देशों से आती है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारत पहुंचती है।
ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी तरह का तनाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा और गैस आपूर्ति श्रृंखला पर सीधा असर डाल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि LNGC दिशा का सुरक्षित भारत पहुंचना संकेत देता है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर लौट रही है।
होर्मुज संकट ने बढ़ाई थी चिंता
अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई शुरू किए जाने के बाद क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ गया था। जवाबी कदम के रूप में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे, जिससे वैश्विक तेल और गैस बाजार में चिंता बढ़ गई थी।
हाल ही में दोनों देशों के बीच हुए समझौते के बाद तेहरान ने सीमित अवधि के लिए समुद्री यातायात को अनुमति दी है। इसी के बाद LNGC दिशा समेत कई वाणिज्यिक जहाजों ने दोबारा इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग का उपयोग शुरू किया।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए सकारात्मक संकेत
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि LNG टैंकर का सुरक्षित भारत पहुंचना घरेलू गैस बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है। इससे बिजली उत्पादन, उर्वरक उद्योग, सिटी गैस वितरण और औद्योगिक क्षेत्रों को स्थिर आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिलेगी।
भारत सरकार भी लगातार ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित बनाए रखने के लिए वैकल्पिक स्रोतों और रणनीतिक भंडारण पर काम कर रही है ताकि भविष्य में किसी वैश्विक संकट का असर कम किया जा सके।
भारत की गैस जरूरतों पर रहेगा फोकस
हालांकि होर्मुज मार्ग फिलहाल खुल गया है, लेकिन पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति अब भी संवेदनशील बनी हुई है। ऐसे में भारत की नजर ऊर्जा आयात की निरंतरता और आपूर्ति सुरक्षा पर बनी रहेगी।
LNGC दिशा का सफल आगमन भारतीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए राहत भरी खबर है और यह संकेत देता है कि संकट के बाद वैश्विक LNG आपूर्ति श्रृंखला धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है।

