पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 के पहले चरण में 92% वोटिंग पर CJI सूर्यकांत ने खुशी जताई। TMC ने कहा डर की वजह से बढ़ी वोटिंग। सुप्रीम कोर्ट में हुई बहस।
नई दिल्ली/कोलकाता | विशेष रिपोर्ट : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में रिकॉर्ड मतदान को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है। इस बीच Surya Kant (CJI) ने 92% से अधिक वोटिंग पर खुशी जताते हुए इसे लोकतंत्र की मजबूती का संकेत बताया। वहीं Trinamool Congress (TMC) की ओर से पेश वकील ने मतदान बढ़ने के पीछे अलग वजह बताई है, जिससे बहस और तेज हो गई है।
🗳️ CJI का बयान: “बढ़-चढ़ कर मतदान लोकतंत्र की ताकत”
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश Surya Kant ने कहा:
“भारत के नागरिक के तौर पर मुझे लोगों को बढ़-चढ़ कर मतदान करते देख खुशी हुई। यह लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है।”
यह टिप्पणी उस समय आई जब कोर्ट 71 याचिकाकर्ताओं के मामले पर सुनवाई कर रहा था, जिनका नाम कथित तौर पर वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट में क्या हुई सुनवाई?
इस मामले की सुनवाई तीन जजों की बेंच ने की:
- Surya Kant
- Joymalya Bagchi
- Vipul M Pancholi
कोर्ट को बताया गया कि पहले चरण में 92% से अधिक मतदान हुआ, जिसे लेकर बेंच ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।
साथ ही, चुनाव के दौरान हिंसा में कमी पर भी संतोष जताया गया।
🛡️ सुरक्षा व्यवस्था पर सरकार का पक्ष
सुनवाई के दौरान Tushar Mehta ने कहा कि:
- सुरक्षा बलों ने लोगों में भरोसा पैदा किया
- इसी वजह से मतदान प्रतिशत में वृद्धि हुई
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बेहतर कानून-व्यवस्था ने मतदाताओं को निर्भय होकर मतदान करने के लिए प्रेरित किया।
🗣️ TMC का दावा: “डर की वजह से बढ़ी वोटिंग”
वहीं Trinamool Congress की ओर से पेश वरिष्ठ वकील Kalyan Banerjee ने अलग तर्क दिया।
उनके मुताबिक:
- लोगों को डर था कि उनका नाम वोटर लिस्ट से हट सकता है
- इसी वजह से प्रवासी मजदूर बड़ी संख्या में मतदान करने पहुंचे
इस दलील पर Tushar Mehta ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा:
“आज राजनीति मत कीजिए।”
📋 वोटर लिस्ट विवाद और ट्रिब्यूनल
वोटर लिस्ट से नाम हटाने के विवाद के बीच Calcutta High Court ने:
- 19 अपीलेट ट्रिब्यूनल गठित किए हैं
- पूर्व जजों की अध्यक्षता में ये ट्रिब्यूनल काम कर रहे हैं
- प्रभावित लोग यहां अपील कर सकते हैं
🔎 क्यों अहम है यह मुद्दा?
- रिकॉर्ड वोटिंग ने राजनीतिक समीकरण बदलने के संकेत दिए
- वोटर लिस्ट विवाद चुनावी पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रहा है
- सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से लोकतांत्रिक भागीदारी को बढ़ावा मिला
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 का पहला चरण केवल मतदान प्रतिशत के कारण ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े राजनीतिक और कानूनी विवादों की वजह से भी सुर्खियों में है। जहां एक तरफ न्यायपालिका इसे लोकतंत्र की मजबूती मान रही है, वहीं राजनीतिक दल इसके पीछे अलग-अलग कारण बता रहे हैं। आने वाले चरणों में यह मुद्दा और गर्माने की संभावना है।

