AAP को बड़ा झटका: Raghav Chadha ने छोड़ी पार्टी, BJP में शामिल होने का ऐलान

AAP को बड़ा झटका! राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने पार्टी छोड़ BJP में शामिल होने का ऐलान किया। 7 सांसदों के पाला बदलने का दावा।

नई दिल्ली | राजनीतिक रिपोर्ट : दिल्ली और पंजाब की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद Raghav Chadha ने पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया है। उनके साथ Sandeep Pathak और Ashok Mittal ने भी Aam Aadmi Party से इस्तीफा देकर Bharatiya Janata Party (BJP) में शामिल होने का फैसला लिया है।

🗣️ “मैं सही आदमी था, गलत पार्टी में” — राघव चड्ढा

प्रेस कॉन्फ्रेंस में Raghav Chadha ने अपनी पूर्व पार्टी पर तीखा हमला करते हुए कहा:

“मैं एक सही आदमी था जो गलत पार्टी में फंसा हुआ था। आम आदमी पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुकी है।”

उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में लिए गए साहसिक फैसलों और जनता के भरोसे ने उन्हें यह कदम उठाने के लिए प्रेरित किया।

🔄 7 सांसदों के पाला बदलने का दावा

राघव चड्ढा ने दावा किया कि उनके अलावा कई अन्य नेता भी AAP छोड़ चुके हैं या छोड़ने वाले हैं। इनमें शामिल नाम:

  • Harbhajan Singh
  • Swati Maliwal
  • Vikramjit Sahney
  • Rajendra Gupta

हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।

⚡ AAP पर भ्रष्टाचार के आरोप

Raghav Chadha ने AAP पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा:

  • पार्टी “भ्रष्टाचार के दलदल” में फंस चुकी है
  • मूल विचारधारा से समझौता किया गया
  • ईमानदार कार्यकर्ता निराश होकर पार्टी छोड़ रहे हैं

उन्होंने यह भी बताया कि एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में अपना करियर छोड़कर वे पार्टी से जुड़े थे, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं।

🏛️ राज्यसभा में बदलेगा समीकरण

तीनों सांसदों के इस्तीफे से Aam Aadmi Party की राज्यसभा में स्थिति कमजोर हो सकती है।

  • संख्या बल में कमी
  • रणनीतिक असर
  • विपक्षी राजनीति पर प्रभाव

📊 दिल्ली-पंजाब की राजनीति में हलचल

इस घटनाक्रम को राजनीतिक विश्लेषक “बड़ा झटका” मान रहे हैं, क्योंकि:

  • तीनों नेता Arvind Kejriwal के करीबी माने जाते थे
  • पार्टी की रणनीति में अहम भूमिका निभाते थे
  • चुनावी समीकरण बदल सकते हैं

AAP से राघव चड्ढा और अन्य सांसदों का इस्तीफा केवल एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि बदलते सियासी समीकरणों का संकेत है। इससे दिल्ली और पंजाब की राजनीति में आने वाले समय में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।