सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: ‘अब तक के कदम पूरी तरह फेल’, दिल्ली-NCR की जहरीली हवा पर CJI सूर्यकांत की बड़ी टिप्पणियां

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR के बढ़ते प्रदूषण पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि अब तक उठाए गए सभी कदम पूरी तरह फेल रहे हैं। CJI सूर्यकांत की 5 बड़ी बातें पढ़ें।

Supreme Court On Delhi-NCR Pollution

दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर कड़ी नाराज़गी जताई है। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अब तक प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए उठाए गए सभी कदम पूरी तरह असफल साबित हुए हैं। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि तात्कालिक फैसलों से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि इसके लिए दीर्घकालिक और ठोस नीति की जरूरत है।

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने वकीलों पर तंज कसते हुए कहा कि इस तरह के मामलों में विशेषज्ञों की सलाह बहुत कम ली जाती है और अदालत में वकील ही एक्सपर्ट बन जाते हैं। कोर्ट ने बच्चों की सेहत को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिल्ली सरकार द्वारा स्कूल बंद करने और हाइब्रिड पढ़ाई लागू करने के फैसले को अस्थायी नीति बताया।

कोर्ट ने स्कूल बंद करने पर दखल से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्कूल बंद करने और ऑनलाइन/हाइब्रिड क्लासेज जैसे कदम केवल जोखिम को अस्थायी रूप से कम करने के लिए हैं। इन्हें स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि सर्दियों में वैसे भी स्कूल 10–15 दिनों के लिए बंद रहते हैं, ऐसे में मौजूदा व्यवस्था को उसी का विस्तार माना जा सकता है। इस मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी को होगी।

दिल्ली-NCR प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट की 5 बड़ी बातें
1. ‘क्या हर घर में वैक्यूम क्लीनर है?’ – गरीब बच्चों पर चिंता

वरिष्ठ वकील गुरुस्वामी ने कोर्ट को बताया कि स्कूल बंद होने से सबसे ज्यादा नुकसान गरीब बच्चों को हो रहा है। उन्होंने कहा कि जब स्कूल बंद होते हैं तो मिड-डे मील भी रुक जाता है, जिससे कुपोषण बढ़ता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या गरीब परिवारों के पास वैक्यूम क्लीनर जैसी सुविधाएं हैं, जिससे बच्चों को घर में सुरक्षित रखा जा सके।

2. 16–17 साल के बच्चों की इम्युनिटी ज्यादा नहीं

सीनियर वकील लूथरा ने 12वीं तक हाइब्रिड क्लास की मांग करते हुए कहा कि ऐसा नहीं है कि 16 या 17 साल के बच्चों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा मजबूत होती है। प्रदूषण सभी उम्र के बच्चों के लिए समान रूप से खतरनाक है।

3. ऑनलाइन पढ़ाई अमीर-गरीब के बीच खाई बढ़ा सकती है

CJI सूर्यकांत ने कहा कि ऑनलाइन या हाइब्रिड शिक्षा व्यवस्था सामाजिक असमानता को बढ़ा सकती है। संपन्न परिवार अपने बच्चों को सुरक्षित रख सकते हैं, लेकिन गरीब परिवारों के बच्चे सबसे ज्यादा जोखिम में रहते हैं।

4. बुजुर्गों के लिए भी हालात गंभीर

कोर्ट ने माना कि वायु प्रदूषण केवल बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि बुजुर्गों के लिए भी बेहद खतरनाक हो चुका है। पार्क और सार्वजनिक स्थानों पर जाना भी अब सुरक्षित नहीं रह गया है।

5. शॉर्ट-टर्म समाधान से नहीं होगा काम

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि केवल इमरजेंसी कदम उठाने से हालात नहीं सुधरेंगे। प्रदूषण से निपटने के लिए सरकारों को समन्वित, वैज्ञानिक और दीर्घकालिक रणनीति अपनानी होगी।

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी यह साफ संकेत देती है कि दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण अब केवल मौसमी समस्या नहीं रह गई है। जब तक सरकारें ठोस नीति और ज़मीनी स्तर पर प्रभावी कदम नहीं उठातीं, तब तक स्कूल बंद करने जैसे अस्थायी समाधान इस संकट को नहीं रोक पाएंगे।